जैसे ही Nobel Prize का पता चला 40 मिनट की नींद ली, इंटरव्यू में बोले अभिजीत बनर्जी

जी, ये सच है. एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि इस कामयाबी की जानकारी मिलने के बाद उनका पहला रिएक्शन क्या था? उन्होंने बताया, 'मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी नोबेल (Nobel Prize) मिल जाएगा. मेरे नाम का जैसे ही ऐलान हुआ...
Abhijit Vinayak Banerjee, जैसे ही Nobel Prize का पता चला 40 मिनट की नींद ली, इंटरव्यू में बोले अभिजीत बनर्जी

फर्ज कीजिए, आप कहीं बैठे हैं और आपको पता चले कि आपका नाम नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) के लिए नामित हुआ है. आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी?

आम तौर पर इस तरह के किसी भी हालात में लोगों की नींद उड़ जाती है. कई लोग तो रात में भी नहीं सो पाते हैं. लेकिन आपको यह जानकर ताज्जुब होगा कि अर्थशास्त्र में नोबेल (Nobel Prize) जीतने वाले अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee) के साथ ऐसा नहीं हुआ. बल्कि उन्हें तो जैसे ही पता चला कि उनका नाम इस सम्मान के लिया चुना गया है वो फौरन सोने के लिए चले गए औऱ 40 मिनट की बेहतरीन नींद ली.

जी, ये सच है. एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि इस कामयाबी की जानकारी मिलने के बाद उनका पहला रिएक्शन क्या था?

उन्होंने बताया, ‘मैंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी नोबेल (Nobel Prize) मिल जाएगा. मेरे नाम का जैसे ही ऐलान हुआ मैं चौंक गया, क्योंकि मैं यह अवॉर्ड 10 साल बाद पाने की उम्मीद कर रहा था.’

उन्होंने आगे बताया, ‘बाद में मैं फौरन सोने चला गया और 40 मिनट की अच्छी नींद ली. मुझे पता था कि जगने के बाद मुझे बधाई वाले कई सारे कॉल अटैंड करने थे.’

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अभिजीत ने अपनी मां से भी बात नहीं की.

दुनिया से ग़रीबी ख़त्म करने के तरीकों की थ्योरी प्रकाशित करने वाले अभिजीत ने बताया कि वो अपनी पत्नी एस्थर डुफलो और अन्य दोस्तों के साथ मिलकर पिछले 20 सालों से इस विषय पर काम कर रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि कोलकाता में बिताए गए दिनों की वजह से ग़रीबी की उलझन समझने में मदद मिली.

नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) जीतने के बाद अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee) ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था डगमगाती स्थिति में है.

उन्होंने कहा कि इस समय उपलब्ध आंकड़ें यह भरोसा नहीं जगाते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था जल्द पटरी पर आ सकती है.

उन्होंने कहा, ‘भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति डगमगाती हुई है. वर्तमान (विकास के) आंकड़ों को देखने के बाद, (निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था के पुनरोद्धार) को लेकर निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता है.’ बनर्जी ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में बताया, ‘पिछले पांच-छह वर्षों में, हमने कम से कम कुछ विकास तो देखा, लेकिन अब वह आश्वासन भी खत्म हो गया है.’

उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन में कभी भी नहीं सोचा था कि उन्हें इतनी जल्दी नोबेल पुरस्कार मिल जाएगा. अभिजीत बनर्जी ने कहा, ‘मैं पिछले 20 वर्षों से शोध कर रहा था. हमने गरीबी उन्मूलन के लिए समाधान देने की कोशिश की.’

बता दें कि भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee), एस्थर डुफलो और माइकल क्रेमर को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize For Economics) दिया गया है.

अभिजीत कोलकाता में पैदा हुए और उन्होंने प्रेसिडेंसी कॉलेज से पढ़ाई की. अभिजीत बनर्जी ने जेएनयू से अर्थशास्त्र में मास्टर्स भी किया. फिलहाल वह अमेरिका की एमआइटी कैंब्रिज में हैं.

ख़ास बात यह है कि अभिजीत को ये पुरस्कार जिन तीन लोगों के साथ मिला है, उनमें एक उनकी पत्नी एस्थर डुफलो हैं और एक उनके सहकर्मी मिखाइल क्रेमेर भी हैं. अभिजीत बनर्जी को दुनिया में गरीबी हटाने के उपायों के लिए शोध पर नोबेल मिला है.

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