जॉन बोल्‍टन: क्‍यों ‘सनकी’ कहलाता है अमेरिका का ये ब्‍यूरोक्रेट, 5 प्‍वॉइंट्स में समझ‍िए

जॉन बोल्‍टन की अमेरिकी ब्‍यूरोक्रेसी में पहचान एक 'सनकी, युद्धोन्‍मादी' अधिकारी की है. कौन है जॉन बोल्‍टन और क्‍यों उन्‍हें हटाया जाना वैश्विक राजनीति में अहम है, आइए समझते हैं.

अमेरिका के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्‍टन को हटा दिया गया. काफी हद तक राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और बोल्‍टन के विचार मेल खाते थे, मगर अब शायद ऐसा नहीं रह गया. दोनों दुनिया हिलाने की इच्‍छा रखते हैं. जॉन बोल्‍टन की अमेरिकी ब्‍यूरोक्रेसी में पहचान एक ‘सनकी, युद्धोन्‍मादी’ अधिकारी की है.

CNN की रिपोर्ट है कि ट्रंप इस बात से नाराज थे कि बोल्‍टन के लोग व्‍हाइट हाउस की बातें लीक कर रहे हैं. ट्रंप ने अपने ट्वीट में कहा भी, “मैंने जॉन बोल्टन को पिछली रात सूचित कर दिया कि व्हाइट हाउस में उनकी सेवा की अब जरूरत नहीं है. मैं उनके कई सुझावों से बिल्कुल असहमत था, और इसलिए मैंने जॉन से इस्तीफे के लिए कहा, जो इस सुबह मुझे मिल गया.”

  1. जॉन बोल्‍टन उन ब्‍यूरोक्रेट्स में से हैं जो अपना काम निकलवाले को कोई भी हद पार कर सकते हैं. अमेरिका ने हाल ही में अफगानिस्‍तान, उत्‍तर कोरिया और ईरान को लेकर जो रवैया अपनाया हुआ है, उसके पीछे बोल्‍टन का ही दिमाग माना जाता है.
  2. ईरान को लेकर बोल्‍टन की साफ सोच है कि अगर वह अमेरिका की बात न माने तो उसपर बम बरसा देने चाहिए.
  3. बोल्‍टन यह मानते हैं कि बिना वक्‍त गंवाए उत्‍तर कोरिया पर हमला कर देना चाहिए, नहीं तो आगे चलकर वह अमेरिका के लिए खतरा बन सकता है. किम जोंग-उन और डोनाल्‍ड ट्रंप की मुलाकात रद्द होने के पीछे भी बोल्‍टन ही थे जिन्‍होंने कड़ी शर्तें रख दी थीं.
  4. रिपब्लिकन पार्टी के समर्थन रहे जॉन बोल्‍टन ने स्‍कूल में राजनीतिक प्रचार किया था. वह ईरान के साथ युद्ध की तरफदारी करने वाली एजेंसी न्‍यू अमेरिकन सेंचुरी के प्रोजेक्‍ट डायरेक्‍टर थे.
  5. बोल्‍टन को हटाया जाना एक तरह से उत्‍तर कोरिया की जीत है. अब वह भी यूएस से बात को तैयार है. जहां तक बोल्‍टन की बात है, तो उनके फॉक्‍स स्‍पोर्ट्स वापस जाने की चर्चा हो रही है.

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