ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब ने आधा किया तेल उत्‍पादन, लग सकती है कीमतों में ‘आग’

ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के ऑइल प्‍लांट पर हमले के बाद से तेल की आपूर्ति की भारी कमी आई है.

नई दिल्‍ली: सऊदी अरब के सबसे बड़े ऑइल प्‍लांट पर ड्रोन हमलों के बाद से खाड़ी में सुनाई दे रही युद्ध की आहट ने बड़ा तेल संकट पैदा कर दिया है.

ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के ऑइल प्‍लांट पर हमले के बाद से तेल की आपूर्ति की भारी कमी आई है. आंकड़ों पर गौर करें तो ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब से प्रतिदिन तेल की आपूर्ति 57 लाख बैरल कम हुई है. यह ग्‍लोबल सप्‍लाई का 6 प्रतिशत है.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले समय में ग्लोबल क्रूड सप्लाई चेन के लिए यह गंभीर चुनौती है और अनियंत्रित युद्ध की स्थिति में विकट हालात पैदा हो सकते हैं।

शनिवार सुबह यमन के हूती विद्रोही संगठन ने सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के अबकैक और खुराइस में स्थित तेल कुओं पर ड्रोन अटैक किए थे. इस हमले के बाद से ही सऊदी अरब की तेल कंपनी ने उत्पादन आधा कर दिया है.

नाइजीरिया नेशनल पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के प्रमुख मेले कयारी ने ब्‍लूमबर्ग के साथ बातचीत में कहा कि सऊदी अरब के प्लांट में जो हमला हुआ है, वह बेहद चिंताजनक है. ड्रोन के जरिए तेल कुओं पर हमले ने यह साबित किया है कि तेल कुओं पर हमले के लिए अडवांस रॉकेट्स की ही जरूरत नहीं है.

वहीं, अमेरिका स्थित रिस्क कंसल्टेंट मिलेना रॉडबैन ने कहा, ‘ड्रोन्‍स के इस्तेमाल से यह पता चलता है कि दुश्मन हवाई ताकत के जरिए तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं.’ उन्होंने कहा कि हूती विद्रोहियों के अलावा संगठन भी सऊदी अरब के तेल कुओं को निशाना बना सकते हैं.