रूस की वैक्सीन फिर सवालों के घेरे में, हर सात में से एक व्यक्ति में मिले साइड इफेक्ट

रूस की कोरोना वायरस वैक्सीन (Corona vaccine) ‘स्पूतनिक-V’ एक बार फिर सवालों के घेरे में है.

  • TV9.com
  • Publish Date - 11:31 pm, Thu, 17 September 20

रूस की कोरोना वायरस वैक्सीन (Corona vaccine) ‘स्पूतनिक-V’ एक बार फिर सवालों के घेरे में है. दरअसल तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में जिन लोगों को स्पूतनिक-V’ वैक्सीन दी जा रही है, उनमें हर सात में से एक में दुष्प्रभाव यानी साइड इफेक्ट देखने को मिल रहे हैं. हालांकि रूसी सरकार ने इन लक्षणों को हल्का बताया है.

रूस के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने ‘मॉस्को टाइम्स’ को दिए गए अपने एक बयान में कहा कि जिन लोगों को ये वैक्सीन दी गई, उनमें से लगभग 14 प्रतिशत में साइड इफेक्ट देखे गए हैं. उन्होंने कहा कि इन साइड इफेक्ट्स में हल्की कमजोरी, 24 घंटे तक मांसपेशियों में दर्द और शरीर के तापमान में वृद्धि आदि शामिल हैं. हालांकि इन लक्षणों को हल्का बताते हुए उन्होंने कहा कि ये अगले ही दिन गायब हो गए.

गंभीर लक्षणों की भी आशंका

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रायल के दौरान वॉलेंटियर्स में जो दुष्प्रभाव देखे गए हैं, वे ज्यादातर हल्के हैं और वैक्सीन की डोज दिए जाने के बाद अक्सर ऐसे साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं. वॉलेंटियर्स में जो लक्षण देखे गए हैं उनमें बुखार, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द और खटास आदि शामिल हैं. कुछ विशेषज्ञों ने ट्रायल में आगे बढ़ने पर अधिक गंभीर और अप्रिय लक्षण दिखने की आशंका भी व्यक्त की है.

रूस ने भारतीय कपंनियों के साथ 10 करोड़ वैक्सीन डोज बनाने का किया करार

मालूम हो कि रूस में कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक-V बनाने वाली सरकारी कंपनी RDIF ने भारतीय फार्मास्यूटिकल कंपनी डॉक्टर रेड्डी लैब के साथ 10 करोड़ वैक्सीन डोज तैयार करने के लिए करार हुआ है. बता दें कि कोरोना की रूस ने स्पूतनिक फाइव वैक्सीन को मॉस्को के गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडिमियोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी के साथ मिलकर विकसित किया है.

बीते माह ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे लॉन्च किया था. इस वैक्सीन का अभी केवल पहले और दूसरे चरण का ट्रायल पूरा हुआ है. वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल इसके प्रयोग के साथ-साथ ही चलता रहेगा. रूस कई अलग-अलग देशों में 40,000 लोगों पर तीसरे चरण का ट्रायल कर रहा है.