FATF की बैठक से पहले पाकिस्‍तान बेचैन, सता रहा ब्‍लैकलिस्‍ट होने का डर, चीन से लगाए बैठा है आस

अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task Force) की अहम बैठक से पहले पाक सरकार की नींद उड़ी हुई है.

  • TV9 Digital
  • Publish Date - 8:41 pm, Tue, 22 September 20

अक्टूबर में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (Financial Action Task Force) की अहम बैठक से पहले पाक सरकार की नींद उड़ी हुई है.अक्टूबर में फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ओर से पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डालने को लेकर फैसला आएगा.

एफएटीएफ की बैठक से पहले पाकिस्‍तान एक बार फिर से मदद के लिए अपने करीबी चीन, तुर्की और मलेशिया से मदद की आस लगाए है. ताकि आतंक के वित्तपोषण मामले में वह फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की कार्रवाई से बच सके.

FATF की बैठक में पाकिस्तान पर होगा अहम फैसला

FATF की एशियाइ ईकाई, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की एशिया-पैसिफिक ज्वाइंट ग्रुप की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है. 18 से 23 अक्टूबर के बीच यह बैठक होनी है. मालूम हो कि इससे पहले मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ पकिस्तान के उपायों की समीक्षा के लिए बीते 15-16 सितंबर को एशिया-पैसिफिक ज्वाइंट ग्रुप, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की एक वर्चुअल बैठक हुई थी.इसमें पाकिस्तान की 27-बिंदु कार्य योजना की समीक्षा की गई.

पाकिस्तान,अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने इस बैठक में हिस्सा लिया.इनके अलावा चीन, भारत, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया ने भी इसमें मौजूद रहे. इस बैठक में सामने आई सिफारिशों को अब आगामी 16 अक्टूबर को एफएटीएफ के सामने रखा जाएगा.अक्टूबर में होने वाली एफएटीएफ की अहम बैठक में पाकिस्तान के ब्लैक लिस्ट में जाने को लेकर अहम फैसला लिया जाएगा.

चीन पहले ही पाकिस्तान को दे चुका है मदद का भरोसा

उल्लेखनीय है कि तब पाकिस्तान में चीन के निर्वतमान राजदूत याओ जिंग ने एशिया-पैसिफिक ज्वाइंट ग्रुप की बैठक के एक दिन बाद पाक के वित्त मंत्री अब्दुल हफीज शेख द्वारा आयोजित विदाई समारोह में शिरकत की थी.तब पाकिस्तान में चीन के निर्वतमान राजदूत याओ जिंग ने अपने एक आधिकारिक बयान में पाक के वित्त मंत्री अब्दुल हफीज शेख को भरोसा दिया और कहा था कि अक्टूबर में होने वाली एफएटीएफ की बैठक पाकिस्तान के लिए अच्छी होगी.

पाकिस्तान को चीन, तुर्की और मलेशिया से उम्मीद

हर बार की तरह पाकिस्‍तान को चीन, तुर्की और मलेशिया से मदद की आस है. बता दें कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत समेत कई देशों ने पाकिस्‍तान को ब्‍लैक लिस्‍ट में डालने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जोर—शोर से अभियान चलाया.

लेकिन तब भी आखिर में चीन, तुर्की और मलेशिया के विरोध के बाद पाकिस्तान ब्‍लैक लिस्‍ट में जाने से बच गया. हालांकि ये तीनों देश पाकिस्तान को ग्रे लिस्‍ट में जाने से नहीं बचा पाए. बता दें कि 36 देशों वाले एफएटीएफ चार्टर के मुताबिक किसी भी देश को ब्लैक लिस्ट न करने के लिए कम से कम तीन देशों का समर्थन मिला जरूरी होता है. पाकिस्तान फिलहाल ग्रे लिस्ट में है, और उसकी इससे बाहर निकलने की लगातार कोशिश जारी हैं.

बता दें कि एफएटीएफ ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला था. उस वक्‍त एफएटीएफ ने पाकिस्‍तान में ब्लैक लिस्ट से खुद को बचाने के लिए 27 सूत्रीय एक्शन प्लान सौंपा था.