खुद को मानवाधिकारों का समर्थक बता कर HRC सत्र का मजाक न बनाए पाकिस्तान- भारत

जिनेवा में चल रहे मानवाधिकार परिषद के 45वें सत्र (HRC) में भारत ने कश्मीर और अल्पसंख्यकों पर पाकिस्तान की टिप्पणी के खिलाफ राइट ऑफ रिप्लाई का इस्तेमाल कर पाकिस्तान को खूब खरी-खरी सुनाई.

भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव पवन बाधे

पाकिस्तान (Pakistan) किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर (Kashmir) का मामला उठाने से बाज नहीं आता. वहीं इसके उलट भारत हर बार तभी के तभी जवाब देकर उसकी बोलती बंद कर देता है. ऐसा ही एक बार फिर हुआ है. जिनेवा में चल रहे मानवाधिकार परिषद के 45वें सत्र में भारत ने कश्मीर और अल्पसंख्यकों पर पाकिस्तान की टिप्पणी के खिलाफ राइट ऑफ रिप्लाई का इस्तेमाल किया.

इस दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव पवन बाधे ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के खिलाफ अपमानजनक और अस्वीकार्य भाषा इस्तेमाल करने से पाकिस्तान अपने मानवाधिकार के संदिग्ध रिकॉर्ड को सुधार नहीं सकता है.

पवन बाधे ने कहा कि दुनिया जब अच्छी प्रगति कर रही है, तब भी पाकिस्तान आधुनिक कानूनों, लोकतंत्र और मानव अधिकारों के वास्तविक अर्थ को सही तरीके से समझ नहीं पा रहा है. पाक अधिकारियों को जवाबदेही की भाषा, मौलिक आजादी और सार्वजनिक भागीदारी का मतलब समझने की जरूरत है.

भारतीय अधिकारी ने आगे कहा, “सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को बदनाम करने के लगातार प्रयास करने यह तथ्य नहीं बदलने वाला कि दसियों हजार अल्पसंख्यक पाकिस्तान से अपनी जान बचा कर भाग रहे हैं.”

“पाकिस्तान को विरासत में मिली नफरत”

प्रथम सचिव ने कहा पाकिस्तान को विरासत में नफरत ही मिली और वो उसी विरासत को लेकर चल रहा है. इसलिए जब कोई व्यक्ति या देश मानवाधिकारों की बात करता है, तो पाकिस्तान उसके खिलाफ असहिष्णुता दिखाता है.

बाधे ने आगे कहा, “खुद को राजनीतिक असंतुष्टों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अल्पसंख्यकों और मानवाधिकार रक्षकों का प्रबल समर्थक बता कर पाकिस्तान को इस अगस्त फोरम का मजाक नहीं बनाना चाहिए. इसके लिए पाकिस्तान को अभी मीलों का सफर पूरा करना होगा.”

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