आतंकियों के खिलाफ फर्जी FIR दर्ज करा रहा पाकिस्तान, दुनिया के सामने खुल गई पोल

कानून के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान ने आतंकियों के खिलाफ जो एफआईआर दर्ज की है वो अदालत में टिक ही नहीं पाएगी.

नई दिल्ली: पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर से दुनिया के सामने उजागर हो गया है. पाकिस्तान अपनी सरजमीं पर फल-फूल रहे आतंकी संगठनों के खिलाफ बस दिखावे के लिए एफआईआर (FIR) दर्ज करा रहा है. फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट से बचने के लिए पाकिस्तान ऐसा कर रहा है.

कानून के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान ने आतंकियों के खिलाफ जो एफआईआर दर्ज की है वो अदालत में टिक ही नहीं पाएगी. ऐसे में पाक आतंकी बड़ी आसानी से बच जाएंगे. साथ ही पाकिस्तान भी एफएटीएफ को गुमराह करने में कामयाब हो जाएगा.

गलत तरीके से जमीन हड़पने का मामला
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरांवाला पुलिस स्टेशन में आतंकियों पर ये एफआईआर एक जुलाई को दर्ज की गई थी. इसमें लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के संगठन दावा-वल-इरशाद पर गलत तरीके से जमीन हड़पने का मामला दर्ज किया गया है. इस एफआईआर की भाषा ऐसी है कि कोर्ट में आगे चलकर उन्हें बरी कर देगा.

इस एफआईआर में लश्कर चीफ हाफिज सईद का नाम कहीं पर भी नहीं दर्ज किया गया है. साथ ही आतंकी संठगन लश्कर-ए-तैयबा को संचालित करने वाले अब्दुल गफ्फार, हाफिज मसूद, आमिर हमजा और मालिक जाफर इकबाल के नाम भी एफआईआर से गायब है. एफआईआर में इस बात का जिक्र तक नहीं है कि लश्कर इस जमीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए करने जा रहे थे.

FATF की बैठक में पाकिस्तान पर पड़ा दबाव 
गौरतलब है कि बैंकॉक में हुए एफएटीएफ की बैठक में अमेरिका ने दुनियाभर के नेताओं के सामने पाकिस्तान से प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और उनके नेताओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने को कहा था.

अंतरराष्ट्रीय संस्थान एफएटीएफ आतंकियों को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर रोक लगाने का काम करती है. एफएटीएफ की अक्टूबर में बैठक होने वाली है जिसमें यह फैसला किया जाएगा कि आतंकियों के शरणदाता पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में रखा जाए या नहीं.

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