पाकिस्तान का स्पेस प्रोग्राम कबका हो चुका है फुस्स, आज उड़ा रहा चंद्रयान-2 का मजाक

आज भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो की गिनती दुनिया की सबसे ताकतवर स्पेस एजेंसियों में होती है. वहीं, पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी सुपारको का नाम भी बहुत कम लोगों ने सुना है.

भारत के मून लैंडर विक्रम से इसरो का संपर्क उस वक्त टूट गया, जब वह चंद्रमा की सतह से महज 2.1 किलोमीटर की दूरी पर था. चंद्रयान के रास्ते से भटकने पर देशभर में निराशा का माहौल छा गया. इसके बावजूद लोगों ने वैज्ञानिकों की खूब सराहना की और उनका धन्यवाद भी किया.

दूसरी तरफ, पाकिस्तान इसे लेकर भारत का मजाक बनाने में लगा हुआ है. पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीकी मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने इस पर कई बेहूदा ट्वीट किए. उन्होंने लिखा, “…जो काम आता नहीं पंगा नहीं लेते ना… डियर “एंडिया”. उन्होंने मिशन एंड होने की वजह से व्यंग्य में इंडिया को “एंडिया”लिखा.

भारत से पहले हुआ था PAK स्पेस एजेंसी का गठन
आज भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो की गिनती दुनिया की सबसे ताकतवर स्पेस एजेंसियों में होती है. वहीं, पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी सुपारको का नाम भी बहुत कम लोगों ने सुना है. दिलचस्प है कि पाकिस्तानी स्पेस प्रोग्राम की शुरुआत भारत से कई साल पहले हुई थी. सुपारको की स्थापना साल 1961 में हुई थी जबकि इसरो की स्थापना साल 1969 में हुई थी.

पाकिस्तान ने 7 जून 1962 में अपना पहला रॉकेट छोड़ा था. इस रॉकेट को ‘रहबर-1’ नाम दिया गया था. सुपारको के इस रॉकेट का मुख्य मकसद मौसम के बारे में जानकारी जुटाना था. पूरे उपमहाद्वीप में पाकिस्तान ऐसा करने वाला पहला मुल्क बन गया था. साथ ही अंतरिक्ष में सफलता पूर्वक रॉकेट छोड़ने वाला दुनिया का 10वां मुल्क था.

जनरल अयूब खान के दौर में आई तेजी
जनरल अयूब खान के दौर में पाकिस्तानी स्पेस कार्यक्रम काफी तेजी से आगे बढ़ रहा था. पाकिस्तान को उन दिनों अमेरिका और पश्चिमी देशों से मदद मिल रही थी. लेकिन जनरल याह्या खान और प्रधानमंत्री ज़ुल्फिकार अली भुट्टो के दौर में प्राथमिकताएं बदल गईं. जनरल जिया-उल-हक और बाद के शासकों के आने के बाद ‘सुपारको’ लगभग भूला सा दिया गया.

दूसरी तरफ, पाकिस्तान अपने एटॉमिक प्रोग्राम को काफी गुप्त तरीके से अंजाम तक पहुंचाता रहा. पाकिस्तान का सारा फोकस एटम बम, मिसाइल तकनीक और फायटर जेट हासिल करने पर लग चुका था. इस तरह से पाकिस्तान का स्पेस कार्यक्रम अपने लक्ष्य से बहुत पीछे चला गया. और बाद में किए गए कुछ प्रयास भी इसमें रंग नहीं ला पाए.

1990 में लॉन्च कर पाया पहला सेटेलाइट
पाकिस्तान ने अपना पहला सेटेलाइट बद्र-1 साल 1990 में चीन से अंतरिक्ष में लॉन्च किया. इसके बाद पाकिस्तान अपना दूसरा सेटेलाइट समय पर लॉन्च नहीं कर पाया. आखिरकार साल 2001 में अमेरिका की मदद से इसकी लॉन्चिंग की गई.इसके बाद पाकिस्तान अपना दूसरा सेटेलाइट समय पर लॉन्च नहीं कर पाया. इसे पाकसैट-1ई नाम दिया गया था.

आगे चलकर सीनियर फौजा अफसर सुपारको के प्रमुख बनने लगे. देखा जाए तो साल 2001 के बाद से सुपारको के चीफ पाकिस्तान फौज के मेजर जनरल रैंक के अफसर ही होते रहे हैं. इससे पाकिस्तान का स्पेस प्रोग्राम धीमा होता चला गया. सुपारको में रिसर्च के काम से होते चले गए.

ये भी पढ़ें-

Chandrayaan-2: पूरे देश को था सफल लैंडिंग का इंतजार लेकिन इन 90 सेकंड ने बदल दिया सब कुछ

चंद्रयान-2 से संपर्क टूटने पर पाकिस्तानी मंत्री ने किए बेहूदा ट्वीट, यूजर्स ने लगाई लताड़

‘चंद्रयान-2 95 प्रतिशत सलामत, एक साल तक चंद्रमा की तस्वीरें भेजता रहेगा ऑर्बिटर’