‘तुम्हारा समय खत्म हुआ,’ कहकर पाकिस्तानी सेना ने चलाई प्रदर्शनकारी पश्तूनों पर गोलियां

पिछले महीने, सेना ने पीटीएम पर विदेशी खुफिया एजेंसियों द्वारा फंड किए जाने का आरोप लगाया और नेताओं को चेतावनी दी कि उनका "समय खत्म" हो गया है.

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान क्षेत्र में पश्तूनों के लगातार गायब होने के खिलाफ पश्तून तहफुज्ज मूवमेंट (पीटीएम) ने प्रदर्शन किया. रविवार को पीटीएम के इस प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी सेना ने उनपर गोलियां बरसा दीं. जिसमें कम से कम तीन लोग मारे गए हैं. जबकि 15 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं. हालांकि स्थानीय लोगों की मानें तो ये आंकड़ा और ज्यादा हो सकता है.

वहीं पाकिस्तानी सेना ने इन मौतों का ठीगरा पीटीएम के सिर पर ही फोड़ा है. सेना ने एक बयान में कहा कि रविवार सुबह उत्तरी वजीरिस्तान के खार कमर इलाके में एक चौकी के पास, दो पीटीएम नेताओं के नेतृत्व में गोलीबारी हुई, जो संसद के सदस्य भी हैं. हालांकि हमले की शुरुआत किसने की इसपर कई अलग-अलग रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं.

पीटीएम कार्यकर्ताओं ने अल जजीरा से बातचीत मे कहा कि सैनिकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाई थीं. जबकि सेना ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पोस्ट पर हमला किया, जिसका नेतृत्व मोहसिन डावर और अली वजीर ने किया. ये दोनों ही इन इलाकों से नेशनल असेंबली के निर्वाचित सदस्य हैं.

सेना के बयान में कहा गया कि हिंसा के बाद वजीर और आठ अन्य को हिरासत में ले लिया गया है. जबकि डावर लापता हैं. सेना के मुताबिक घायल होने वालों में पांच सैनिक भी हैं. पीटीएम नेता के भाई सौद डावर ने मीडिया को बताया कि परिवार के सदस्यों को यह जानकारी जरूर मिली की मोहसिन डावर सही सलामत हैं. लेकिन उनसे परिवार का सीधा संपर्क अभी तक नहीं हुआ है.

पीटीएम पर लगा आतंक को पालन का आरोप

डावर और वजीर सेना द्वारा कथित तौर पर हजारों निर्दोष पश्तूनों का अपहरण किए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे. हालांकि सेना का कहना है कि जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है वह आतंकवादियों को सुविधा मुहैया कराता था.

पिछले साल जनवरी महीने में पीटीएम ने तब सुर्खियां बटोरी जब पुलिस द्वारा दक्षिण वजीरिस्तान के एक युवक नकीबउल्लाह महसूद की असाधारण हत्या के खिलाफ इसने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया था.

इस समूह का नेतृत्व युद्धग्रस्त कबीलाई जिलों के युवा कार्यकर्ता कर रहे हैं, जहां पाकिस्तान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और उसके सहयोगियों के खिलाफ बड़े स्तर पर युद्ध छेड़ रखा है. यह समूह युद्ध में सशस्त्र बलों द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे अधिकारों के हनन की जवाबदेही के लिए अभियान चला रहा है.

पीटीएम की तीन मुख्य मांगें हैं

  • आदिवासी जिलों से लैंड माइंस और आयुध को हटाया जाए.
  • सशस्त्र समूहों के खिलाफ पाकिस्तान की इस लड़ाई में हो रही सामान्य लोगों की हत्याएं बंद हो.
  • उन हजारों लोगों की जवाबदेही जो सेना के कारण लापता हुए हैं.

उत्तरी वजीरिस्तान कभी तहरीक-ए-तालिबान का गढ़ माना जाता था. पाकिस्तान की सेना ने साल 2014 में तालिबान के खात्में के लिए यहां सुरक्षा अभियान चलाया था. पीटीएम के अभियान ने अक्सर पाकिस्तान की उस शक्तिशाली सेना को चुनौती दी है, जिसने देश के 71 साल के इतिहास में लगभग आधा समय उसपर शासन किया है.

सेना ने कहा था ‘तुम्हारा समय समाप्त हो गया है’

पिछले महीने, सेना ने पीटीएम पर विदेशी खुफिया एजेंसियों द्वारा फंड किए जाने का आरोप लगाया और नेताओं को चेतावनी दी कि उनका “समय समाप्त” हो गया है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा था, “जिस तरह से वे दूसरों के हाथों में खेल रहे हैं, उनका समय खत्म हो गया है.”

पीटीएम जिसने वर्षों से मनमाने ढंग से हिरासतों का सामना किया है, उसके नेताओं के खिलाफ देशद्रोह के कई आरोप लगाए गए हैं और उनके खिलाफ हो रहे अत्याचारों की मीडिया कवरेज पर भी प्रतिबंध लगा है, उसके खिलाफ आसिफ गफूर का ये बयान अब तक के सबसे जबरदस्त बयानों में से एक है.

रविवार को, पीटीएम नेता मंजूर पश्तीन ने कहा कि उनका समूह शांतिपूर्वक न्याय के लिए लड़ता रहेगा. पश्तीन ने ट्वीट किया, ”यह गफूर के ‘समय खत्म हो गया है’ वाली धमकी’ का फॉलो अप है.”

उन्होंने ट्वीट में लिखा, “पिछले कुछ दिनों से (सेना की) सोशल मीडिया टीमें आज के इस हमले के लिए माहौल बना रही थीं. इस हमले का कड़ा विरोध करें. पीटीएम अपने अहिंसक संवैधानिक संघर्ष को जारी रखेगा.”

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