पाकिस्तानी पत्रकार मतीउल्लाह की आपबीती, बताया- किडनैपिंग से रिहाई तक क्या हुआ उनके साथ?

वीडियो में मतीउल्लाह (Matiullah Jan) ने आगे बताया कि जहां उन्हें रखा गया वह जगह एक पुलिस स्टेशन (Police Station) की तरह दिखती थी और जिन्होंने उनका अपहरण किया वो पुश्तो बोलने की कोशिश कर रहे थे.
Pakistani journalist Matiullah, पाकिस्तानी पत्रकार मतीउल्लाह की आपबीती, बताया- किडनैपिंग से रिहाई तक क्या हुआ उनके साथ?

पाकिस्तान की शक्तिशाली संस्थाओं की आलोचना करने वालों में शुमार वरिष्ठ पत्रकार मतीउल्लाह जान (Matiullah Jan) को मंगलवार को दिन-दहाड़े अगवा कर लिया गया था. हालांकि जब इस अपहरण को लेकर सरकार (Pakistan Government) पर सवाल खड़े होने लगे, तो अपहरणकर्ताओं ने उन्हें रिहा कर दिया. रिहाई के बाद अब मतीउल्लाह जान ने अपने अपहरण को लेकर पाकिस्तानी की सिक्योरिटी एजेंसीज (Pakistan’s Security Agencies) पर सवाल खड़े किए हैं.

लोगों के विरोध से बची जान

गुरुवार को ऑनलाइन रिलीज हुए एक वीडियो में मतीउल्लाह ने कहा कि कि कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें किसने उठाया, क्योंकि सभी एजेंसीज एक ही साथ हैं. साथ ही मतीउल्लाह ने उन सभी लोगों को धन्यवाद दिया जो उनके अपहरण का विरोध करने के लिए खड़े हुए थे. उन्होंने कहा कि यह संभव इसलिए हो पाया, क्योंकि लोगों ने बहुत ही दृढ़ता के साथ अपनी प्रतिक्रिया दी, जिससे कि मेरी जान बच गई.

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मतीउल्लाह को मंगलवार सुबह करीब 11 बजे इस्लामाबाद के एक पब्लिक स्कूल के बाहर से दिन-दहाड़े अगवा किया गया था. करीब 12 घंटे बाद उन्हें इस्लामाबाद की एक सुनसान जगह पर छोड़ दिया गया. गुरुवार को जो वीडियो रिलीज हुआ उसमें वो उर्दू में बात कर रहे हैं.

मुझसे कहा गया- पता होने चाहिए थे परिणाम

उन्होंने बताया कि कैसे उनके चेहरे पर हुड लगाया गया था. उनके हाथ बांध दिए गए, आखो पर पट्टी बांधी गई, जैसे कि वो किसी डिंटेशन में थे. मतीउल्लाह ने वो लम्हा याद किया कि कैसे अपहरण के दौरान उन्हें धक्का दिया गया था. मतीउल्लाह ने कहा कि उन्होंने मुझसे कहा कि वे जानते थे कि मैं कौन था और मैं जो कर रहा था मुझे उसके परिणामों के बारे में पता होना चाहिए.

पुलिस स्टेशन जैसी दिखने वाली जगह पर रखा

मतीउल्लाह ने बताया कि उनके आंखों पर बंधी पट्टी के दो फोल्ड थे. उन्होंने कहा कि मानों ऐसा लग रहा था कि जैसे वे चाहते थे कि मैं देंखू कि मुझे कहां रखा जा रहा है. वीडियो में मतीउल्लाह ने आगे बताया कि जहां उन्हें रखा गया वह जगह एक पुलिस स्टेशन की तरह दिखती थी और जिन्होंने उनका अपहरण किया वो पुश्तो बोलने की कोशिश कर रहे थे. हालांकि मैं बता सकता हूं कि जिस तरह से वो बोलने की कोशिश कर रहे थे वो मूल रूप से पुश्तो के रहने वाले नहीं थे.

12 घंटे बाद सुनसान जगह पर छोड़ा

कई घंटे अपने पास रखने के बाद अपहरणकर्ता उन्हें एक सुनसान जगह पर ले गए, जहां दोबारा से उनका नाम पूछा गया. मतीउल्लाह ने कहा कि यहां मेरे अपहरणकर्ताओं ने मुझसे मेरा नाम पूछा और जब मैंने अपना नाम फिर से बताया, तो उन्हें लगा कि उन्होंने गलत व्यक्ति का अपहरण कर लिया है. थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरी हथकड़ी खोल दी और फिर मुझे बीच में ही छोड़ दिया.

अदालत ने करार दिया कथित अपहरण

मतीउल्लाह ने वीडियो में आगे कहा कि इसके बाद वे अपने पास की जगह पर पहुंचे, जहां से वे फिर अपने घर पहुंच पाए. उन्होंने कहा कि जब उनके जीवन को बख्शा गया था, एक संदेश उन लोगों द्वारा दिया गया जो लगातार लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ लड़ते हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें सबसे बड़ी निराशा तब हुई जब वह रिहा होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे. अदालत ने यह स्वीकार करने के बजाए कि सच में मेरा अपहरण हुआ था, इसे “कथित” अपहरण करार देते हुए रिपोर्ट दर्ज करने को कहा.

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