पश्तूनों की खुली बगावत से इमरान खान पर आफत, जानें इनसे क्यों घबराया पाकिस्तान

पश्तूनों से इमरान खान इतने डरे हुए हैं कि मंजूर पश्तीन के जलसे को रोकने के लिए पूरी सरकारी व्यवस्था कर रखी है.

कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद पाकिस्तान पागलपन की हदें पार कर रहा है. इमरान ख़ान ने हर हथकंडा अपना लिया है लेकिन उन्हें कहीं से भी किसी का सपोर्ट नहीं मिल रहा और अब तो इमरान अंदर से कांप रहे हैं कि कहीं पीओके पाकिस्तान से न छिन जाए.

लेकिन अब पाकिस्तान पर डबल प्रहार हुआ है. पीओके और बलूचों के बाद अब पश्तूनों ने भी खुल्लम खुल्ला जंग का ऐलान कर दिया है. पश्तून लगतार सड़क पर उतर रहे हैं. इमरान खान और बाजवा के खिलाफ आवाज़ लगा रहे हैं.

पाकिस्तानी आर्मी ने ढ़ाया जुल्म

ये लोग पाकिस्तानी हुक्मरानों की बर्बरता के ज़िंदा सबूत हैं. जिनके हक़ को पाकिस्तानी आर्मी ने बूटों के नीचे सालों से बेहिसाब रौंदा है. पाकिस्तान के सरकारी बंदूक धारियों ने जिनकी छाती पर चढ़कर खूनी खेल खेला है. जिनके अपनों के खून से पाकिस्तानी सेना ने अपनी तरक्की की चिट्ठी तैयारी की है.

अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े होने वाले इन लोगों को पाकिस्तान में पश्तून कहा जाता है. वो पश्तून जो बावजा की फौज के लिए अपनी तरक्की का सबसे आसान शिकार है. अपने दर्द को शब्द देने के लिए इन पश्तूनों की उम्मीद हैं मंज़ूर अहमद पश्तीन.

पश्तून से कांपती है पूरी पाकिस्तानी हुकूमत

अपनी ही सरकार को खुल्लम-खुल्ला चेलैंज करने वाले मंजूर पश्तून के बारे में पहले जानिए. फिर आपको विस्तार से बताएंगे कि मंजूर पश्तीन से कितने डरे हुए हैं इमरान खान. कितने डरे हुए हैं बाजवा. क्यों कांपती है पूरी पाकिस्तानी हुकूमत इसके नाम से.

कौन है मंजूर अहमद पश्तीन?

  • इमरान खाने के सपनों में आने वाला ये मंजूर अहमद पश्तीन सिर्फ 25 साल का है.
  • गरीब पश्तून खानदान में जन्मे मंजूर पश्तीन महसूद कबीले से ताल्लुक रखता है.
  • पाकिस्तानी सरकार की दमनकारी नीति के खिलाफ बने संगठन पश्तून प्रोटेक्शन मूवमेंट का नेता है.
  • 25 बरस के मंजूर पश्तीन जब लाखों लोगों की आवाज़ बनकर बोलते हैं तो पाकिस्तानी हुकूमत के सेंटर की नींव हिल जाती है.

पश्तूनों की आवाज़ बनकर गूंजते मंजूर के शब्द इमरान खान के दिलों में शूल की तरह गड़ता है. मंजूर की आवाज़ इमरान खान और उनकी पूरी जिहादी गिरोह को चैन से सोने नहीं देती.

पाकिस्तान में अघोषित पाबंदी

पश्तूनों की सच्चाई पाकिस्तानी हुक्मरानों को चैन से सोने नहीं देती. लिहाजा मंजूर के भाषण से, इसके एक-एक शब्द से इतने खौफ खाते हैं इमरान खान की पूछिए मत. इस आवाज़ पर पूरे पाकिस्तान में अघोषित पाबंदी है.

इस 25 साल के लड़के पर इमरान खान ने पाबंदी लगा रखी है. पाकिस्तान के किसी भी न्यूज़ चैनल पर मंजूर पश्तीन की स्पीच नहीं दिखाई जाती. किसी भी अख़बार की हिम्मत नहीं है कि अपने ही देश के एक इलाके से सबसे बड़े नेता की ख़बर छाप दे.

संसदीय राजनीति में आने की इजाजत नहीं

जिस देश में दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी छाती ठोककर चुनाव लड़ता है, वहां पर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे पश्तून प्रोटेक्शन मूवमेंट को संसदीय राजनीति में आने की इजाजत नहीं है. इसीलिए लहू उबल रहा है पश्तीनियों की.

इतने बैन के बवाजूद भी जब मंजूर पश्तीन खड़े होते हैं बोलने के लिए तो असंख्य भीड़ इकट्ठा हो जाती है उन्हें सुनने के लिए. सरकारी क्रूरता के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए. मंजूर पश्तून को अपना सर्वमान्य समर्थन देने के लिए.

दमनकारी व्यवस्था है पाकिस्तान में

मंजूर पश्तीन की आह और उस आह से निकली आवाज़ को जब अंदर महसूस करेंगे तब पता चलेगा कि दर्द की दरिया में कितने अंदर गड़े हुए हैं ये लोग. पाकिस्तान में क्रूरता किस तरह पाराकाष्ठा पर तांडव करती है. इतनी दमनकारी व्यवस्था है पाकिस्तान में.

पश्तून के बारे में मुख्य बातें…

  • पाकिस्तान के अफगानिस्तान से सटी सीमा पर दक्षिण वजरीस्तान में पश्तून रहते हैं.
  • यह इलाका फेडरल एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरिया यानी फाटा के अंतर्गत आता है.
  • यहां पर बड़ी संख्या में पाकिस्तानी आर्मी के जवान तैनात रहते हैं.
  • पाकिस्तानी आर्मी पश्तून महिलाओं के साथ हैवानियत करती है.
  • पश्तुन नौजवानों को घर से उठाकर गोलियां मार देते हैं.
  • ज्यादार इलाकों में लैंडमाइन बिछाकर रखते हैं, जिससे पश्तूनों की मौत होती है.
  • पिछले एक दशक में हजारों लोगों की जानें जा चुकी हैं, जबकि हजारों पश्तून बेघर हो चुके हैं.
  • पाकिस्तानी आर्मी और वायुसेना के हमलों की वजह से हजारों पाकिस्तानी पश्तून देश छोड़कर भागने के लिए मजबूर हो गए.
  • बताया जा रहा है कि करीब 8 हज़ार पश्तून लोग अब तक लापता हो चुके हैं.
  • हर एक पश्तूनों को पाकिस्तान में शक के नज़रिए से देखा जाता है.

हर दिन पाकिस्तनी सेना की हैवानियत से जूझने वाले पश्तूनों के लिए पाकिस्तान में सांस लेना तक मुश्किल है. दशकों से पाकिस्तानी आर्मी की बंदूक की नोंक पर जीने वाले पश्तून के अंदर की आग पिछले साल धंधक उठी.

नकीबुल्लाह मेहसूद को कराची में मार दिया

जनवरी 2018 में दक्षिणी वज़ीरिस्तान के रहने वाले नकीबुल्लाह मेहसूद को कराची में मार दिया गया. नकीबुल्लाह एक उभरता हुआ मॉडल था. नकीबुल्लाह की मौत के बाद इकट्ठे पश्तूनों ने सरकार के खिलाफ आवाज़ बुलंद करनी शुरू की.

अब तो स्थिति ये है कि इमरान खान तो मंजूर पश्तीन का नाम सुनते ही कांपने लगते हैं. मंजूर पश्तीन के एक-एक शब्द में, एक-एक वाक्य में आक्रोश टपकता है. पाकिस्तान की नाक में दम करने वाला इस पठान की मांग क्या है, ज़रा वो समझिए.

ये है इनकी मांग

  • पिछले 10 सालों में पाकिस्तानी आर्मी ने जिन सैकड़ों पश्तूनों को आतंकी कहकर गायब किया है, उसे अदालत में पेश करे.
  • अफ़ग़ान सीमा से लगे क़बायली इलाक़ों में अंग्रेज़ों के दौर का काला क़ानून एफ़सीआर ख़त्म करे सरकार.
  • दूसरे क़बायली इलाक़ों को वही बुनियादी हक दिए जाएं जो लाहौर, कराची और इस्लामाबाद के नागरिकों को हासिल हैं.
  • पाकिस्तानी फ़ौजियों की वजह से जो घर और कारोबार तबाह हुए उनका मुआवज़ा दिया जाए.
  • चेक पोस्ट पर पश्तूनों से इंसानों की तरह सलूक किया जाए.

इन्हीं मांगों को इमरान खान और आर्मी चीफ बाजवा भयभीत हैं. हालांकि हुकूमती बर्बरता के बावजूद मंजूर पश्तीन अपनी क्रूर सरकार को चैलेंज करते हैं. इन पश्तूनों से इमरान खान इतने डरे हुए हैं कि मंजूर पश्तीन के जलसे को रोकने के लिए पूरी सरकारी व्यवस्था कर रखी है.

जहां-जहां रैलियां होती है, वहां पहले से ही रुकवाटों का पूरा इंतजाम किया जाता है.इसी साल मई के आखिरी हफ्ते में निहत्थे पश्तून प्रदर्शनकारियों को पाकिस्तानी सेना ने गोलियों सो भून दिया था.

मगर पाकिस्तान की बर्बर व्यवस्था को खिलाफ अपनी लड़ाई को आखिरी मुकाम तक पहुंचाने के लिए जंग ए मैदान में उतरे मंजूर पश्तीन की मुहिम जारी है.

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