व्लादिमीर पुतिन 2036 तक बने रह सकते हैं रूस के राष्ट्रपति, विपक्ष ने लगाया धांधली का आरोप

विपक्षी राजनेता एलेक्सी नावल्‍नी (Alexei Navalny) ने वोटिंग पर सवाल उठाए हैं और इसे एक बड़ा झूठ और अवैध करार देते हुए कहा कि इसे पुतिन के लिए आजीवन राष्ट्रपति पद को वैध बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था.
vladimir putin president till 2036, व्लादिमीर पुतिन 2036 तक बने रह सकते हैं रूस के राष्ट्रपति, विपक्ष ने लगाया धांधली का आरोप

रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) को 2036 तक पद पर बने रहने का प्रावधान करने वाले कानून पर जनमत संग्रह कराया गया था, जिसके बुधवार को नतीजे आ गए. जनमत संग्रह में हरी झंडी मिलने के बाद अब पुतिन दो बार और राष्ट्रपति बन सकते हैं. 7 दिनों तक चले इस जनमत संग्रह में 60 प्रतिशत वोटिंग हुई और 76.9 प्रतिशत मतदाताओं ने इसे लेकर संविधान में सुधार का समर्थन किया.

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कोरोनावायरस संकट (Coronavirus) को देखते हुए ऑनलाइन वोटिंग कराई गई थी, जिस वजह से पहली बार रूस में किसी वोटिंग में इतना समय लगा.

विपक्ष ने वोटिंग का किया विरोध

विपक्षी राजनेता एलेक्सी नावल्‍नी (Alexei Navalny) ने वोटिंग पर सवाल उठाए हैं और इसे एक बड़ा झूठ और अवैध करार देते हुए कहा कि इसे पुतिन के लिए आजीवन राष्ट्रपति पद को वैध बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था. एलेक्सी ने कहा कि 67 साल के व्लादिमीर पुतिन 2000 से राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में हैं. वह खुद को जीवनभर के लिए राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं. पोल बंद होने के बाद उन्होंने अपने ब्लॉग पर लिखा, “पुतिन तब तक कुर्सी नहीं छोड़ेंगे, जब तक हम हजारों-लाखों लोग सड़कों पर उतरना शुरू नहीं करते.” इसे लेकर सेंट्रल मॉस्को और सेंट-पीटर्सबर्ग में बुधवार को कुछ छोटे विरोध प्रदर्शन हुए.

वोटिंग में धांधली का लगाया गया आरोप

चुनाव आयोग के प्रमुख एला पामफिलोवा ने जनमत संग्रह में किसी भी प्रकार की धांधली से इनकार करते हुए कहा कि केवल एक-दो जगह उल्लंघन की पुष्टि हुई है और नतीजों पर उनका कोई असर नहीं पड़ा.

जनता के समर्थन का मांगा गया सबूत

क्रेमलिन (Kremlin) के पूर्व राजनीतिक सलाहकार ग्लेब पाव्लोव्स्की (Gleb Pavlovsky) ने कहा कि कोरोनावायरस संक्रमण के खतरे को दरकिनार कर पुतिन ने यह वोटिंग करवाई है. यह उनकी संभावित कमजोरी को दर्शाता है. उन्होंने कहा, ‘पुतिन को अपने करीबियों का विश्वास हासिल नहीं है और वह इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आगे क्या होगा.’

पुतिन ने जनवरी में संविधान संशोधन का प्रस्ताव रखा था. पुतिन ने मतदाताओं से कहा था कि रूस के भविष्य की स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए परिवर्तनों की जरूरत है. पहले जनमत संग्रह के लिए 22 अप्रैल का दिन तय किया गया था, लेकिन कोरोनोवायरस महामारी को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया था.

लोगों ने कई सुधारों के लिए भी की वोटिंग

रूस की जनता ने पुतिन को राष्ट्रपति पद के लिए दो कार्यकाल की इजाजत देने के साथ-साथ कई अन्य संशोधनों के लिए भी वोटिंग की है. इसमें न्यूनतम गारंटी पेंशन और समलैंगिक विवाह पर प्रतिबंध जैसे मुद्दे शामिल हैं. पुतिन का कार्यकाल 2024 में समाप्त होने वाला है और अब वह 2036 तक सत्ता में काबिज रह सकेंगे.

रूस के व्लादिवोस्तोक के एक मतदान केंद्र पर 79 वर्षीय वेलेंटीना कुंगुरत्सेवा (Valentina Kungurtseva) ने बताया कि उन्‍होंंने सुधारों का समर्थन किया है. उन्‍होंने कहा, “पेंशनर के रूप में हमारे लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वे हर साल हमारी पेंशन में वृद्धि करें. जब तक हमारे पास एक अच्छा राष्ट्रपति है, जीवन अच्छा चलेगा.”

वहीं सेंट पीटर्सबर्ग (Saint Petersburg) शहर के 20-वर्षीय सर्गेई गोरिट्सोव ने कहा कि उन्होंने सुधारों का विरोध किया, लेकिन इस बात का संदेह था कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा, “मैंने मतदान किया और मुझे उम्मीद है कि हम में से कई होंगे. कम से कम मैंने अपनी राय व्यक्त की.”

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