नेपाल: सड़क से संसद तक PM केपी ओली का हो रहा विरोध, विदेश नीति को लेकर उठ रहे हैं सवाल

विपक्षी दलों की एक बैठक में निष्कर्ष निकाला गया कि ओली सरकार ने बहुत ही असंतुलित और गैर-जिम्मेदार विदेश नीति अपनाई है, जो नेपाल के अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों में बाधा पैदा कर रही है.
KP Sharma Oli foreign policy, नेपाल: सड़क से संसद तक PM केपी ओली का हो रहा विरोध, विदेश नीति को लेकर उठ रहे हैं सवाल

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का विरोध उनके ही देश में सड़क से लेकर संसद तक शुरू हो गया है. एक तरफ जहां नेपाल की विपक्षी पार्टियां उनकी विदेश नीति को लेकर हमलावर हैं तो वहीं दूसरी तरफ नेपाल की जनता ही केपी ओली के इस्तीफे की मांग कर रही है. केपी ओली की खुद की पार्टी में भी उनके इस्तीफे को लेकर मांग जोर पकड़ती जा रही है.

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दरअसल नेपाल के लोग चीन के राजदूत हाओ यान्की और काठमांडू में चीन के मिशन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं. जिसके चलते केपी ओली सरकार और विपक्ष के निशाने पर आ गई है. न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक हाओ पिछले 48 घंटों के दौरान कई वरिष्ठ नेपाली नेताओं से मिले हैं, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार और झाला नाथ खनाल शामिल हैं.

क्या अब रिमोट कंट्रोल के जरिए चलेगा नेपाल?

हाओ ने मंगलवार को खनाल के साथ 45 मिनट की बैठक के दौरान सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर आंतरिक विवादों पर चिंता व्यक्त की और चीनी दूत ने पूर्व पीएम को पार्टी के भीतर मतभेदों को सुलझाने की दिशा में काम करने का सुझाव दिया. ये मुलाकातें ऐसे समय पर हुई हैं, जब नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली और उन्ही की पार्टी में विरोधियों का नेतृत्व कर रहे पार्टी चेयरमैन पुष्प कमल दहल प्रचंड के बीच सत्ता संघर्ष को लेकर बातचीत का दौर जारी है. प्रचंड सीधे-सीधे ओली के प्रधानमंत्री और पार्टी चेयरमैन के पद से इस्तीफी के मांग कर चुके हैं.

सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के साथ चीनी दूत की बैठक को लेकर विपक्षी दल भी सत्ताधारी पार्टी पर हमलावर हैं. इस बैठक का जिक्र करते हुए पूर्व विदेश मंत्री और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के प्रमुख कमल थापा ने ट्वीट कर कहा, “क्या रिमोट कंट्रोल के जरिए लोकतांत्रिक गणराज्य का संचालन नेपाली लोगों को फायदा पहुंचाएगा?”

ओली सरकार की अपरिपक्व विदेश नीति के खिलाफ विपक्ष

वहीं अन्य विपक्षी दलों की तरफ से भी नेपाल की ओली सरकार पर अपरिपक्व विदेशी नीति के चलते हमला बोला जा रहा है. काठमांडू पोस्ट ने के मुताबिक मंगलवार को विपक्षी दलों की एक बैठक में निष्कर्ष निकाला गया कि ओली सरकार ने बहुत ही असंतुलित और गैर-जिम्मेदार विदेश नीति अपनाई है, जो नेपाल के अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों में बाधा पैदा कर रही है.

नेपाली कांग्रेस (NC) और जनता समाज पार्टी (JSP) के नेताओं के मुताबिक इस अपरिपक्व विदेश नीति के कारण, पड़ोसियों के साथ संबंध बिगड़ने के साथ-साथ बहुत जटिल हो गए हैं. नेपाली कांग्रेस के उपाध्यक्ष बिमलेंद्र निधि ने भारत का नाम लिए बिना कहा, “बैठक का निष्कर्ष है कि नेपाल सरकार की अपरिपक्व विदेश नीति के कारण अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध बनाने में कठिनाइयां आ रही हैं.”

केपी ओली की इन समस्याओं की शुरुआत तभी से हो गई थी, जब उन्होंने भारत के कुछ क्षेत्रों को अपना बताते हुए नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था. हालांकि पिछले महीने नेपाल कांग्रेस और JSP ने ओली सरकार के नक्शे से जुड़े संविधान संशोधन का समर्थन किया था. अब चीन समर्थक 68 साल के पीएम ओली का राजनीतिक करियर किस दिशा में जाएगा, इसका फैसला बुधवार को सत्ताधारी पार्टी की स्थाई समिति की बैठक में तय किया जाएगा.

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