जन्माष्टमी पर 200 साल पुराने श्रीनाथ मंदिर जाएंगे PM मोदी, मुकेश अंबानी भी हैं इनके भक्‍त

थट्टाई हिंदू सौदागर समुदाय के अध्यक्ष बॉब ठाकेर ने कहा कि मंदिर से लगा एक ज्ञान केंद्र और एक संग्रहालय भी होगा.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय बहरीन यात्रा के दौरान 200 साल पुराने भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर की पुनर्निर्माण परियोजना का शुभारंभ करेंगे. इस पर 42 लाख डॉलर की लागत आएगी. थट्टाई हिंदू सौदागर समुदाय के अध्यक्ष बॉब ठाकेर ने कहा कि नवनिर्मित ढांचा 45,000 वर्ग फुट में होगा और इसके 80 फीसदी हिस्से में कहीं अधिक श्रद्धालुओं के लिए जगह होगी. मंदिर से लगा एक ज्ञान केंद्र और एक संग्रहालय भी होगा.

जिस मंदिर से प्रेरणा लेकर मुस्लिम मुल्क में श्रीनाथ जी का मंदिर बनाया गया है वो पौराणिक मंदिर राजस्थान के उदयपुर में है. ये वही श्रीनाथ जी हैं जिनके चमत्कारों की दर्जनों कहानियां प्रचलित हैं. इनके सबसे बड़े भक्त इस देश के सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी हैं.

दिल्ली से करीब 600 किलोमीटर दूर राजस्थान के नाथद्वारा में भगवान श्रीनाथ जी का धाम है. श्रीकृष्ण भगवान के बाल अवतार श्रीनाथ जी के चमत्कार के साक्षी बनने की ख्वाहिश लेकर लाखों भक्त यहां आते हैं. लोग कहते हैं कि श्रीनाथ जी में इतनी शक्ति है कि भक्तों की हर मुराद पूरी हो जाती है.

नादिर शाह से जुड़ी मशहूर कहानी
श्रीनाथ जी के चमत्कारों को लेकर तरह तरह की कहानियां स्थानीय लोग बताते हैं. ऐसी ही एक कहानी मंदिर के खजाने को लूटने आए विदेशी लुटेरे नादिर शाह से जुड़ी है. कहते हैं कि दिल्ली को लूटने के बाद नादिर शाह ने नाथद्वारा पर हमला किया. मकसद था श्रीनाथ जी का खजाना लूटना.

लोग दावा करते हैं कि जैसे ही नादिर शाह ने मंदिर की सीढ़ियां चढना शुरू किया. वहां बैठे एक फकीर ने नादिर शाह को चेतावनी दी कि अगर वो मंदिर में घुसा तो उसके आंखों की रौशनी चली जाएगी. नादिर शाह नहीं माना, आगे बढ़ा और जैसे ही श्रीनाथ जी की प्रतिमा के सामने पहुंचा, वो अंधा हो गया.

कहा जाता है कि श्रीनाथ जी की प्रतिमा में जो हीरा जड़ा है. वो नादिर शाह ने ही दिया था. स्थानीय लोग ये भी दावा करते हैं कि आंखों के रौशनी जाने के बाद नादिर शाह ने अपने गुनाह के लिए बार-बार माफी मांगी, तौबा किया. इसके बाद ही उसके आंखों की रौशनी लौटी थी.

आज भी नाथद्वार में हर साल बादशाह की सवारी निकाली जाती है, जो श्रीनाथ मंदिर के चमत्कार की कहानी बयां करती है. हर साल श्रीनाथ मंदिर में अन्नकूट महोत्सव होता है. इस महोत्सव के दौरान लाखों लोग श्रीनाथ मंदिर से चमत्कारी प्रसाद लेने आते हैं.

इस मंदिर में खासतौर पर चावल बनाया जाता है, उस चावल को भक्त अपने साथ ले जाते हैं. मान्यता है कि चावल के रूप में मिलने वाले प्रसाद को लोग अपनी तिजोरियों में रखते है, क्योंकि उससे तिजोरी कभी खाली नहीं होती. इसे आस्था कहें या अटूट विश्वास. यहां आने वाले भक्तों को भरोसा है कि जो एक बार श्रीनाथ जी के दर पर आता है, उसका हर दर्द मिट जाता है.

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