पोप फ्रांसिस ने आखिर क्यों चूमे नेताओं के पैर?

दो देशों को पास लाने के लिए वैटिकन सिटी के 82 वर्षीय पोप ने बहुत ही भावुक कदम उठाया है.

नई दिल्ली: ऐसा पहली बार हुआ है जब केवल धार्मिक क्रियाओं के दौरान कैदियों के पैर धोने वाले पोप ने किसी और के पैर छुए हों, ऐसा करके पोप ने एक मिसाल कायम की है. ये वाकया जुड़ा है कैथलिक चर्च के हेड और वैटिकन सिटी के अध्यक्ष पोप फ्रांसिस से. उन्होंने बीते गुरुवार को लोगों के सामने विनम्रता और प्रेम का एक नया ढांचा पेश किया है. इस बात से हर किसी को सीख लेनी चाहिए.

पोप फ्रांसिस ने दक्षिण सूडान की लड़खड़ाती शांति प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए एक खूबसूरत पहल की है. इस दौरान उन्होंने अफ्रीकी देश के विपक्षी नेताओं के पैर छुए और उन्हें चूम लिया. इस वाकये ने सबको चौका कर रख दिया.

 

वैटिकन में दो दिन के कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, इसमें कई अफ्रीकी नेता मौजूद थे. इस मौके पर पोप ने दक्षिण सूडान के राष्ट्रपति और विपक्षी नेताओं से चल रहे मुश्किल वक्त के बावजूद शांति समझौते की बात कही.

समझौते की बात करते हुए 82 साल के पोप घुटनों पर बैठ गए. इसके बाद उन्होंने एक-एक करके सभी नेताओं के पैर चूमे. आमतौर पर पोप सिवाय एक रस्म के किसी के पैर नहीं छूते हैं. बता दें कि होली थर्स्डे के मौके पोप कैदियों के पैर धोते हैं.

ये एक आध्यात्मिक समारोह था, जिसे सूडान के राष्ट्रपति सलवा कीर, विपक्षी दल के प्रमुख रीक मचर को एक साथ लाने के लिए का आयोजित किया गया था. इस मौके पर तीन उप राष्ट्रपति भी मौजूद थे. पोप ने इन सभी के पैर चूमे.

पोप फ्रांसिस को नेताओं के पैरों पर झुका देख दक्षिण सूडान की उपराष्ट्रपति रबेका न्यानदेंग गरांग ने कहा कि उनकी नम्र कोशिश ने मुझे बहुत भावुक कर दिया और मैं अपने आंसू नहीं रोक पाई.

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बता दें कि दक्षिण सूडान 2011 में सूडान से आजाद हुआ था. इसके बाद 2013 में सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद और लड़ाइयां हुई, इसमें 4 लाख से ज्यादा लोगों की जान गई. कीर और मचार के बीच पिछले साल ही शांति समझौता हुआ था. लेकिन अभी तक सरकार ने अपने वादों को पूरा नहीं किया है. विपक्ष के मुताबिक अब तक कई मसले नहीं सुलझ पाए हैं.