हांगकांग पर थोपे चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का क्या है मकसद? पढ़ें- क्यों हो रहा दुनिया भर में विरोध

विस्तारवादी कम्यूनिस्ट चीनी सरकार (China Communist government) अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज (Dissent) को दबा देना चाहती है. अंतरराष्ट्रीय जगत में यह साफ है कि उसने इस नए कानून के जरिए हांगकांग (Hong Kong) के प्रदर्शनकारियों को कमजोर करने की कोशिश की है.
China security law imposed on Hong Kong, हांगकांग पर थोपे चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का क्या है मकसद? पढ़ें- क्यों हो रहा दुनिया भर में विरोध

चीन (China) की कम्‍युनिस्‍ट सरकार ने संसद यानी 13 वीं नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) के आखिरी दिन तीसरे पूर्ण अधिवेशन (Plenary Session) में मतदान के जरिए हांगकांग (Hong Kong) में नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (National Security Law) को लागू करने की मंजूरी दे दी. चीन के मुताबिक यह फैसला पिछले साल हांगकांग में हुई हिंसा को देखते हुए लिया गया है.

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चीनी संसद में लगभग सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित किया गया है. ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल (Great Hall of the People) में इस बिल के समर्थन में 2,878 और विपक्ष में महज एक वोट पड़ा.

विवादित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का मतलब

चीन का दावा है कि हांगकांग में ‘एक देश दो व्यवस्थाओं’ के नियम को लागू करेगा. चीन एक तरह से इस नए कानून के तहत हांगकांग के अर्ध-स्वायत्त (Semi-Autonomous) दर्जे को समाप्त करना चाहता है. इस कानून के मुताबिक हांगकांग के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के प्रमुख प्रशासक हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने का कर्तव्य निभाएंगे. वह नियमित रूप से केंद्र सरकार को इसकी रिपोर्ट देंगे.

NPC की स्थायी समिति हांगकांग में इस साल अगस्त तक राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी कानूनी सिस्टम बनाएगी. इसके साथ ही संबंधित कानूनों को हांगकांग के मौजूदा कानूनों के साथ शामिल करेगी.

क्या है चीन का खतरनाक मकसद

विस्तारवादी कम्यूनिस्ट चीनी सरकार अपने खिलाफ उठने वाली हर आवाज को दबा देना चाहती है. अंतरराष्ट्रीय जगत में यह साफ है कि उसने इस नए कानून के जरिए हांगकांग के प्रदर्शनकारियों को कमजोर करने की कोशिश की है. चीन के सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ के मुताबिक इस नए कानून में देशद्रोह, आतंकवाद, विदेशी दखल और विरोध-प्रदर्शन जैसी गतिविधियों को रोकने के नाम पर सख्त प्रावधानों को शामिल किया जा रहा है. हांगकांग में चीन के राष्ट्रगान का अपमान करना भी अब अपराध के दायरे में आ जाएगा.

हांगकांग के मामले में किसी भी विदेशी या बाहरी व्यक्ति या संगठन के किसी भी तरीके से दखल का चीन हमेशा से विरोध करता रहा है. अब उसने इसको कानूनी जामा पहनाने की कोशिश की है. अब वहर जरूरी होने पर जवाब में पाबंदी भी लगा सकता है. इसके अलावा, हांगकांग में अब चीनी सुरक्षा एजेंसियां भी काम कर सकेंगी. पुराना कानून इसकी इजाजत नहीं देता था.

विरोध में सबसे पहले सामने आया अमेरिका

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले यानी शुक्रवार को व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि वे कोरोना महामारी मामले में धोखा देने और हांगकांग मामले में ज्यादती करने पर चीन के खिलाफ पाबंदिया लगा रहे हैं. साथ ही उन्होंने WHO से संबंध खत्म करने का ऐलान भी किया.

उन्होंने कहा कि वे अमेरिका में अध्ययन कर रहे चीनी शोधकर्ताओं पर प्रतिबंध लगाने भी जा रहे हैं. ये लोग अमेरिका की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं. इसके साथ वे अमेरिकी स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध उन चीनी कंपनियों पर कार्रवाई करने भी जा रहे हैं जो अमेरिकी कानूनों का पालन नहीं कर रही हैं. इसके साथ ही व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में हांगकांग को मिले विशेष दर्जे को अमेरिका वापस लेने जा रहा है.

China security law imposed on Hong Kong, हांगकांग पर थोपे चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का क्या है मकसद? पढ़ें- क्यों हो रहा दुनिया भर में विरोध

UNSC में क्या है हलचल

इससे पहले हांगकांग में लोगों के बीच फैले असंतोष (Dissent) को दबाने के लिए चीन के लाए गए नये कानून पर चर्चा करने के लिए अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) की तत्काल ऑनलाइन बैठक बुलाने की अपील की है. चीन ने हांगकांग के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा पर कानून को पूरी तरह से आंतरिक मामला बताते हुए बैठक की अपील का विरोध किया. चीन की आपत्ति के बाद भी 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद ने शुक्रवार को हांगकांग पर बंद कमरे में अनौपचारिक चर्चा की. इसके बाद जवाब में चीन ने रूस के साथ मिलकर अमेरिका में अश्वेतों की हत्या का मामला उठाया.

ब्रिटेन-ऑस्ट्रेलिया-कनाडा ने बताया समझौते का उल्लंघन

अमेरिका के साथ ही ब्रिटेन और यूरोपियन यूनियन ने भी चीन के इस विवादित नए राष्टीय सुरक्षा कानून की निंदा करते हुए इसे हांगकांग वासियों की आजादी पर हमला बताया है. ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने संयुक्त बयान जारी कर चीन की हरकत पर चिंता जताई है. इन देशों मे चीन से इस प्रक्रिया को फौरन रोकने के लिए कहा.

इस साझा बयान में चीन के विवादित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को एक राष्ट्र-दो व्यवस्था के सिद्धांत का उल्लंघन बताया है. इसी सिद्धांत पर समझौते के बाद 1997 में ब्रिटेन ने 150 साल के शासन उपरांत हांगकांग को चीन को सौंपा था. ब्रिटेन ने तो अपने पासपोर्ट वाले हांगकांग के लोगों को ब्रिटिश नागरिकता देने की भी चर्चा की है.

हांगकांग में कई दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के खिलाफ हांगकांग में कई दिनों से लगातार प्रदर्शन भी हो रहे हैं. चीन के ताजा कदम को हांगकांग के साथ धोखा बताया जा रहा है. हांगकांग का शासन फिलहाल 1200 सदस्यों की चुनाव समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी चलाते हैं. अलजजीरा के मुताबिक चीन ने कानून बनाने का यह फैसला हांगकांग की अथॉरिटीज से बिना सलाह और स्थानीय नेताओं से बहस के बिना ही किया है.

‘हांगकांग बार एसोसिएशन’ ने कहा कि चीन का यह नया कानून अदालतों में दिक्कतों में फंस सकता है क्योंकि बीजिंग के पास अपने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को पूर्व ब्रिटिश कॉलोनी के लिए लागू करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है.

रॉयटर्स के मुताबिक, चीन के नए कानून के विरोध में हांगकांग के लाखों लोग सड़कों पर उतर गए. प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए. लोगों ने काले कपड़े पहनकर तमाम ऐतिहासिक जगहों पर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों की ओर से ‘हांगकांग के साथ एकजुट’, ‘हांगकांग को आजाद करो’ और ‘हमारे दौर की क्रांति’ जैसे नारे लगाए जा रहे हैं. प्रदर्शन को दबाने के लिए लगातार गिरफ्तारियां की जा रही हैं.

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