चीन में महंगा हुआ सुअर का मांस, 70वीं सालगिरह पर पड़ा रंग में भंग

चीन के लोग पोर्क कितना पसंद करते हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीन में टोटल मीट का प्रोडक्‍शन का 60 प्रतिशत हिस्‍सा पोर्क का ही होता है.

नई दिल्‍ली: चीन मंगलवार को 70वीं सालगिरह मनाने जा रहा है. चीन में यह दिन बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन इस बार कुछ रंग में भंग पड़ता दिखाई दे रहा है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है पोर्क (सुअर का मांस) की बढ़ती कीमतें. बढ़ती कीमतों को काबू करने के लिए चीन ने पिछले कुछ समय में 30,000 टन सुअर का मांस बाजार में भेजा, लेकिन अब भी बाजार में कीमतों पर काबू नहीं पाया जा सका है.

चीन के लोग पोर्क कितना पसंद करते हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीन में टोटल मीट का प्रोडक्‍शन का 60 प्रतिशत हिस्‍सा पोर्क का ही होता है.

चीन में चिकन और बीफ की जगह सुअर का मांस ही सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल होता है. चीन में फाउंडर्स डे वीक के दौरान भी सबसे ज्‍यादा डिश पोर्क से ही बनती हैं.

चीन में पोर्क की बढ़ती कीमतों के पीछे सबसे बड़ा कारण है अफ्रीकन स्‍वाइन फ्लू. इसकी वजह से लाखों सुअर मारे गए. चीन में सबसे ज्‍यादा सुअर हैं, करीब-करीब दुनिया के 50 प्रतिशत.

अफ्रीकन स्‍वाइन फ्लू के चलते चीन में करीब 9 लाख से ज्‍यादा सुअरों को मार दिया गया. अगस्त महीने में सबसे पहले इस बीमारी के बारे में पता चला था, इसके बाद यह फ्लू चीन के 24 प्रांतों पहुंच गया. इससे चीन के पोर्क बाजार (सुअरों के कारोबार) को काफी नुकसान पहुंचा है. एक आंकड़े से मानें तो साल 2017 में चीन में करीब 70 करोड़ सुअर काटे और बेचे गए.