Satire:बाजवा को एक्‍सटेंशन नहीं देते तो टेंशन में पड़ जाते इमरान खान

भारत के आक्रामक रुख के चलते इमरान खान पूरे पाकिस्‍तान में निशाने पर हैं. अगर वह बाजवा का कार्यकाल नहीं बढ़ाते तो पाकिस्‍तान के आर्मी चीफ इमरान खान का कार्यकाल छोटा कर देते, क्‍योंकि इस समय तख्‍तापलट के लिहाज से पाकिस्‍तान के हालात एकदम परफेक्‍ट हैं.

‘मरता क्‍या न करता’, जब सामने सेना का जनरल खड़ा हो, वो भी ऐसे देश में जहां तख्‍तापलट होने में ज्‍यादा देर नहीं लगती तो बेचारा प्रधानमंत्री कर भी सकता है? जिस देश के ये हालात हैं, उसका नाम है- पाकिस्‍तान, सीना तानकर कार्यकाल बढ़ाने की मांग करने वाले जनरल हैं- कमर जावेद बाजवा, जिन्‍हें नवाज शरीफ ने सेनाप्रमुख चुना था और जो प्रधानमंत्री बेचारा है उसका नाम है- इमरान खान.
इमरान खान को हमेशा से सेना का ‘फेवरेट’ माना जाता है. उनका राजनीतिक कद बढ़ाने में भी सेना ने काफी मदद की. जब यूसुफ रजा गिलानी पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री थे और अश्‍फाक परवेज कियानी सेनाप्रमुख के पद पर मौजूद थे, तब इमरान खान ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. मुद्दा था कियानी का कार्यकाल बढ़ाया जाना. अश्‍फाक परवेज कियानी वही आर्मी चीफ हैं, जिनके जमाने में मेमोगेट स्‍कैंडल हुआ था.

मेमोगेट स्‍कैंडल मतलब वो घटना जो पाकिस्‍तान के राजनीतिक इतिहास में कभी नहीं हुई. उस समय गिलानी पीएम थे और जरदारी पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति. दोनों चाहते थे कि अमेरिकी सेना पाकिस्‍तान को पूर्ण लोकतांत्रिक बनाने में मदद करे. मतलब सरकार को सेना के चंगुल से छुड़ाया जाए. जरदारी ने अमेरिका से यहां तक वादा कर दिया था कि वह सभी आतंकी ठिकानों को नष्‍ट कर देंगे और हाफिज सईद को भारत को सौंप देंगे, लेकिन अमेरिका से जरदारी गिलानी को मदद नहीं मिली और मामला भी इंटरनेशनल मीडिया में सामने आ गया.

मेमोगेट स्‍कैंडल से बौखलाए कियानी को जैसे-तैसे गिलानी और जरदारी ने संभाला और उन्‍हें 3 साल का एक्‍सटेंशन देकर मामला जैसे-तैसे शांत किया गया. इमरान खान ने तब कहा था कि संस्‍थाएं कानून से चलती हैं और कियानी का कार्यकाल बढ़ाए जाने का खुलकर विरोध किया था. अब खुद इमरान खान को बाजवा का कार्यकाल 3 साल बढ़ा दिया. वो भी उस बाजवा का, जिसके सेनाप्रमुख रहते भारत ने पाकिस्‍तान में सर्जिकल स्‍ट्राइक की, बालाकोट स्‍ट्राइक की और आर्टिकल 370 हटाकर पाकिस्‍तान को मुंहतोड़ जवाब भी दे दिया. मतलब बाजवा की काबिलियत पाकिस्‍तान में शुरुआत से सवालों के घेरे में रही. ऐसे में उनका कार्यकाल बढ़ाया जाना बताता है कि इमरान खान कितने मजबूर प्रधानमंत्री हैं.

इमरान खान का एक असफल आर्मी चीफ को 3 साल एक्‍सटेंशन देना बताता है कि पाकिस्‍तान में सरकार के पास कोई ताकत ही नहीं है. वहां सिर्फ सेना ही ‘शासन’ है. पाकिस्‍तान में जब आर्मी चीफ को सत्‍ता हथियानी होती है, वह तख्‍तापलट कर देगा और जब आर्मी चीफ को कार्यकाल बढ़वाना होता है तो वह प्रधानमंत्री की कनपटी पर बंदूक रखकर अपनी मर्जी का फैसला करा लेता है.

वैसे भी इस समय भारत के आक्रामक रुख के चलते इमरान खान पूरे पाकिस्‍तान में निशाने पर हैं. अगर वह बाजवा का कार्यकाल नहीं बढ़ाते तो पाकिस्‍तान के आर्मी चीफ इमरान खान का कार्यकाल छोटा कर देते, क्‍योंकि इस समय तख्‍तापलट के लिहाज से पाकिस्‍तान के हालात एकदम परफेक्‍ट हैं. सर्जिकल स्‍ट्राइक, बालाकोट एयर स्‍ट्राइक और अब आर्टिकल 370 के बाद पाकिस्‍तान बुरी तरह एक्‍सपोज हो चुका है. भारत से आर्थिक संबंध तोड़ने के बाद पाकिस्‍तान की बची-खुची अर्थव्‍यवस्‍था भी चरमरा गई. इस समय पाकिस्‍तान में रोटी 30 रुपए की हो गई है, ऐसे हालात में इमरान खान करते भी तो क्‍या? बाजवा को एक्‍सटेंशन नहीं देते तो वह हालात का फायदा उठाकर खुद ही सत्‍ता हाथ में ले लेते.

पाकिस्‍तान में सेना की ताकत के कई उदाहरण और भी हैं

-1958 में पाकिस्तान के पहले राष्ट्रपति मेजर जनरल इस्‍कंदर मिर्जा ने प्रधानमंत्री फिरोज खान नून की सरकार को भंग करके देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया था. इस्‍कंदर मिर्जा ने आर्मी कमांडर इन चीफ जनरल अयूब खान पर भरोसा किया, लेकिन 13 दिन बाद जो उसका अंदाजा इस्‍कंदर मिर्जा को नहीं था, अयूब खान ने तख्तापलट कर दिया और देश के राष्ट्रपति को पद से हटाते हुए खुद ही कमान संभाल ली. यह पाकिस्‍तान का पहला तख्‍तापलट था.

-पाकिस्‍तान में दूसरा तख्‍तापलट जनरल जिया उल हक ने किया. 1977 में उन्‍होंने जुल्फीकार अली भुट्टो का तख्‍तापलट कर उन्‍हें फांसी पर चढ़वा दिया था.

-1999 में परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ सरकार का तख्‍तापलट कर दिया था. बाद में नवाज शरीफ और उने मंत्रियों को गिरफ्तार कर लिया. उस समय अटकलें गर्म थीं कि नवाज शरीफ को फांसी पर चढ़ाया जा सकता है. हालांकि, मुशर्रफ ने ऐसा नहीं किया और नवाज शरीफ को देश से निष्‍कासित कर दिया गया.