रक्तरंजित रहा है श्रीलंका का इतिहास, पढ़िए इससे पहले कब-कब हुए आतंकी हमले

श्रीलंका की जमीन पर साल 1998, 1999, 1996, 2001 में धमाके हुए फिर पांच साल 2006 में हुए बम धमाके में 100 लोगों से अधिक लोगों की जान गई.

कोलंबो: श्रीलंका में रविवार को तीन चर्च और होटलों को निशाना बनाकर किए गए छह विस्फोटों में 150 से अधिक लोग मारे गए जबकि 450 से ज्यादा घायल हो गए हैं.

ये घटना ऐसे समय हुई है जब ईसाई समुदाय ईस्टर मना रहा है. समाचार पत्र द डेली मिरर के मुताबिक, विस्फोट कोच्चिकाडे के कोटाहेना स्थित सेंट एंथनी चर्च (राजधानी कोलंबो से लगभग 50 किलोमीटर दूर) में, काटना के कटुवापिटिया स्थित सेंट सेबेस्टियन चर्च (कोलंबो से लगभग 50 किलोमीटर दूर) में और तीसरा बटीकालोआ के जियॉन चर्च (कोलंबो से लगभग 325 किलोमीटर दूर) में हुआ है.

अन्य तीन विस्फोट कोलंबो के फाइव-स्टार होटलों शंगरी-ला, सिनैमन ग्रैंड और किंग्सबरी में हुए हैं. बटीकालोआ टीचिंग हॉस्पिटल के मुताबिक, मृतकों में से 25 बटीकालोआ में मारे गए हैं. कोलंबो नेशनल हॉस्पिटल के सूत्रों ने बताया कि 450 से अधिक घायलों को भर्ती कराया गया है.

श्रीलंका में इससे पहले भी कई धमाके हुए हैं, इनमें से अधिकतर धमाके तमिल आतंकी संगठन लिबरेश टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (लिट्टे) ने किए हैं.

– साल 1987 में लिट्टे ने पहली बार आत्मघाती बम विस्फोट किया था जिसमें कैप्टन मिलर ने श्रीलंकाई सेना के शिविर में विस्फोटकों से लदे एक ट्रक को उड़ा दिया था. इस हमले में 40 सैनिक मारे गए थे.
– साल 1990 में लिट्टे ने 11 जून को इस्टर्न प्रोविएंस में धमाका किया था जिसमें उनका निशान श्रीलंका के पुलिस कर्मी थी और इनका मिशन पूरा भी हुआ था. इस हमले में 600 से अधिक लोगों की जान गई थी.
– 18 जुलाई 1996 से 25 जुलाई 1996 के बीच श्रीलंका के मुल्लातिवु में मिलट्री और लिट्टे की बीच भयंकर लड़ाई चली. इस दौरान हजारों लोगों की जान गई. हालांकि सरकारी आंकड़ों में 207 लोगों की ही मौत बताई गई.
– 15 अक्टूबर 1997 में कोलंबो के वर्ड ट्रेंड सेंटर में धमाका हुआ जिसमें 17 लोगों की मौत हुई थी.
– 1998 में श्रीलंका के कैंडी में स्थित टूथ रेलिक के मंदिर पर हमला हुआ. यह हमला भी लिट्टे द्वारा किया गया थो जिसमें 17 लोगों की जान गई थी और 25 लोगों से अधिक घायल हुए थे. यह मंदिर श्रीलंका में बौद्धों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है इसमें बुद्ध के दांत का अवशेष है और यह यूनेस्को द्वारा नामित विश्व धरोहर स्थल भी है.
– श्रीलंका की जमीन पर साल 1998, 1999, 1996, 2001 में धमाके हुए फिर पांच साल 2006 में हुए बम धमाके में 100 लोगों से अधिक लोगों की जान गई.
– इसके बाद 2008 और 2009 में बम धमाके हुए, साल 2009 में दो बार धमाके हुए थे जो फरवरी और मार्च में थे. हालांकि इन धमाकों के बाद आज 21 अप्रैल 2019 को 10 साला बाद श्रीलंका की धरती पर धमाके हुए हैं.

कैसे बना लिट्टे संगठन
मई 1976 में वेलुपिल्लई प्रभाकरन ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम संगठन की स्थापना की. संगठन श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में तमिल ईलम नाम से अलग स्वतंत्र राज्य बनाने की चाहत रखते थे. इस मांग को लेकर सरकार और संगठन के बीच लंबे समय तक युद्ध चलता रहा. हालांकि साल 2009 में श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की अध्यक्षता में मामले को सुलझा लिया गया.