कौन है ‘कराची का किंग’ अल्ताफ हुसैन जो मांग रहा है भारत में शरण और आर्थिक मदद

पाकिस्तान में मुहाजिरों की लड़ाई लड़ने वाले अल्ताफ हुसैन ने कहा है कि भारत में उनके हजारों पूर्वज दफन हैं.

साल 1978 में पाकिस्तान में छात्र संगठन ‘ऑल पाकिस्तान मुत्ताहिदा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन’ की नींव रखी गई. ये संगठन आगे चलकर में मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के नाम से मुकम्मल सेकुलर राजनैतिक संगठन बन गया, जिसके पहुंच पाकिस्तान में जमीनी लेवल पर है. इस संगठन की नींव अल्ताफ हुसैन ने रखी थी जो अभी लंदन में शरण लिए हुए हैं. अब वो भारत आना चाहते हैं और इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी से गुहार लगाई है.

अल्ताफ हुसैन को एक जमाने में ‘कराची का किंग’ कहा जाता था. आज भी कराची में जनसभाओं को संबोधित करने के लिए उन्हें मोबाइल का सहारा लेते देखा जाता है जिसके कारण लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता बनी हुई है. उन्होंने पीएम मोदी से भारत में शरण और आर्थिक मदद मांगी है, कहा है कि भारत में उनके हजारों रिश्तेदार दफ्न हैं.

MQM Founder Altaf Hussain seeks asylum in India, कौन है ‘कराची का किंग’ अल्ताफ हुसैन जो मांग रहा है भारत में शरण और आर्थिक मदद

मुहाजिरों की लड़ाई

सरफरोश फिल्म में आपने नसीरुद्दीन शाह के किरदार को पाकिस्तान के मुहाजिरों का दर्द बयान करते सुना होगा. मुहाजिर उन रिफ्यूजियों को कहा जाता है जो 1947 में बटवारे के बाद भारत से पाकिस्तान में जा बसे. अल्ताफ हुसैन ने संगठन MQM इन्हीं की लड़ाई लड़ने के उद्देश्य से बनाया था.

MQM का विरोध

इस संगठन को 2006 में कनाडा की फेडरल कोर्ट ने आतंकी संगठन घोषित कर दिया. 7 सितंबर 2015 को लाहौर हाईकोर्ट ने अल्ताफ हुसैन के किसी भी बयान को पाकिस्तान में दिखाने पर रोक लगा दी. उनकी तस्वीर और वीडियोज पर भी पुरी तरह से बैन लगा दिया गया.

MQM  की मांग थी कि सिविल सर्विसेज और यूनिवर्सिटी में सिंधियों को वरीयता दी जाए. उनकी मांग थी कि उर्दू भाषी मुहाजिरों को प्रशासन और सरकारी नौकरियों में तरजीह दी जाए. यही उसके विरोध की वजह बना.

MQM Founder Altaf Hussain seeks asylum in India, कौन है ‘कराची का किंग’ अल्ताफ हुसैन जो मांग रहा है भारत में शरण और आर्थिक मदद

मौजूदा समय में MQM के 25 सांसद हैं, 23 सांसदों ने कुछ दिन पहले इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि कराची में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं पर नियोजित कार्रवाई की जा रही है. कुछ दिन पहले हुए लोकल चुनावों में कराची में इमरान खान और नवाज शरीफ की पार्टी पर अल्ताफ हुसैन की MQM भारी पड़ी और जीत हासिल की.

आगरा में अल्ताफ हुसैन की जड़ें

बटवारे से पहले अल्ताफ का परिवार आगरा में नाई की मंडी में रहता था. पिता भारतीय रेलवे में थे और आगरा में ही तैनात थे. बटवारे में उन्होंने पाकिस्तान जाना चुना और कराची में जाकर बस गए, जहां 1953 में अल्ताफ हुसैन का जन्म हुआ.

अल्ताफ हुसैन जब किशोरावस्था में पहुंच रहे थे तो उन्हें अहसास हुआ कि पंजाबी वर्चस्व वाले पाकिस्तान में उर्दू भाषा बोलने वाले मुहाजिरों के के प्रति सौतेला व्यवहार किया जाता है. उन्हें सेकेंड क्लास सिटिजन माना जाता है. उन्हें समाज में भारी अपमान का सामना करना पड़ता है.

अल्ताफ हुसैन ने मुहाजिरों के हक की लड़ाई लड़ने और उनकी आवाज बनने का फैसला किया. इसी कड़ी में 1978 में छात्र संगठन और 1984 में MQM का उदय हुआ और अल्ताफ हुसैन मुहाजिरों के सर्वमान्य नेता बन गए.

‘सिंध का पीर’

1988 के बाद सिंध में ऐसा माहौल बना कि हर चुनाव में अल्ताफ हुसैन का दबदबा रहने लगा. उनके समर्थकों ने उन्हें पीर घोषित कर दिया. साल 1992 में पाकिस्तान में राजनैतिक हिंसा का दौर चल रहा था. पाकिस्तान सरकार ने मिलिट्री भेजकर MQM का खात्मा करने का सोचा.

अपनी जान को खतरा बताते हुए अल्ताफ हुसैन ने ब्रिटेन जाने का फैसला किया.

2002 में एक क्लरिकल मिस्टेक की वजह से वहां की नागरिकता भी हासिल कर ली. तब से लंदन में वह राजनैतिक शरणार्थी के तौर पर बसे हुए हैं. उनके पाकिस्तान में न रहने से आवाज में कोई कमी नहीं आई है. वहीं से MQM के फैसले लेते हैं और मोबाइल के जरिए कराची की जनता को संबोधित करते हैं.

MQM Founder Altaf Hussain seeks asylum in India, कौन है ‘कराची का किंग’ अल्ताफ हुसैन जो मांग रहा है भारत में शरण और आर्थिक मदद

जून 2014 में लंदन की पुलिस ने अल्ताफ हुसैन को मनी लॉन्ड्रिंग के केस में गिरफ्तार किया और तीन दिन बाद रिहा कर दिया. फिलहाल अल्ताफ हुसैन के ऊपर 3 हजार 576 केस दर्ज हैं.

2013 में नवाज शरीफ की सरकार ने MQM के खिलाफ अभियान शुरू किया. 2015 में पाकिस्तान की आतंकवाद रोधी कोर्ट ने अल्ताफ पर हत्या, हिंसा और अराजकता फैलाने समेत कई मामलों में 81 साल की सजा सुनाकर भगोड़ा घोषित कर दिया.

भारत-पाकिस्तान में दोस्ताना बढ़ाने की कोशिश

साल 2016 में दिए गए एक इंटरव्यू में अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान को दुनिया का कैंसर बताया था. कहा जाता है कि अल्ताफ हुसैन अगर पाकिस्तान में रहते तो उसके टुकड़े करवा देते. उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच कड़वाहट को मिटाने की हमेशा कोशिश की. यहां तक कि भारत पर अल्ताफ हुसैन की मदद और फंडिंग करने के आरोप लगते रहे हैं जिससे MQM और भारत ने हमेशा इनकार किया है.