‘सीरिया से बदतर था कश्‍मीर का हाल, मरना या भागना ही विकल्‍प था’, ग्‍लोबल मंच पर घाटी की काली कहानी

अमेरिका में ह्यूमन राइट्स पर एक सुनवाई के दौरान जानी-मानी कॉलमनिस्‍ट सुनंदा वशिष्ठ ने कई सनसनीखेज खुलासे किए.

Sunanda Vashisht on Kashmir: पाकिस्तानी साजिशों और कश्मीर में बैठे अलगाववादियों की वजह से कश्मीरी पंडितों ने बहुत कुछ झेला. अब कई ऐसी बातें सामने आ रही हैं, जो पहले दुनिया ने कभी नहीं सुनी. अमेरिका में ह्यूमन राइट्स पर एक सुनवाई के दौरान जानी-मानी कॉलमनिस्‍ट सुनंदा वशिष्ठ ने कई सनसनीखेज खुलासे किए. सुनंदा ने यहां तक कहा कि उसके दादा उसकी हत्या कर देना चाहते थे…क्योंकि उन्हें डर था कि मैं अगर कट्टरपंथियों के हाथों लग गई तो क्या होगा?

सुनंदा ने कहा, “हमने पश्चिमी देशों से 30 साल पहले ही कट्टरपंथी इस्‍लामिक आतंकवाद की बर्बरता देखी है. हमने कश्‍मीर में ISIS के लेवल का खौफ और बर्बरता देखी है. मैं खुश हूं कि आज यहां ये सुनवाई हो रही है क्‍योंकि मेरा परिवार और मेरे जैसे कई लोगों ने अपना घर, अपनी आजीविका खोदी और दुनिया चुप रही.”

उन्‍होंने वहां मौजूद लोगों से पूछा, “कहां थे मानवाधिकार के वो वकील जब मेरे अधिकार छीन जा रहे थे? वो 19 जनवरी, 1990 की रात कहां थे जब कश्‍मीर की हर मस्जिद से आवाज उठ रही थी कि वे कश्‍मीर में हिंदू औरतें तो चाहते हैं मगर हिंदू मर्द नहीं?”

सुनंदा ने आगे कहा, “कहां थे मानवता के वो रक्षक जब मुझे और मेरी मां को बदकिस्‍मती से बचाने के लिए मेरे दादा ने किचन के चाकू और जंग लगी कुल्‍हाडी से मारना चाहा?”

सुनंदा के तर्कों की वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तारीफ की है. उन्‍होंने लिखा, “बहुत अच्‍छे सुनंदा वशिष्‍ठ, आप उनकी आवाज हैं जिनकी सुनी जानी चाहिए. मानवाधिकारों की सीमा तय नहीं की जा सकती.”

सुनंदा को टेक्‍सास की सांसद शीला जैक्‍सन ली ने जवाब दिया. उन्‍होंने घाटी में मानवाधिकार सुनिश्चित करने का रास्‍ता पूछा. उन्‍होंने भारत सरकार से अमेरिकी सांसदों को कश्‍मीर जाने की इजाजत भी मांगी.

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