अफगानिस्तान में शांति बहाली के लिए भारत क्यों कर रहा UN में अपील?

तालिबान द्वारा गुरुवार को काबुल में किए गए आत्मघाती हमले में एक अमेरिकी सैनिक समेत 12 लोगों के मारे जाने के बाद वार्ता रद्द की गई.

नई दिल्ली: अमेरिका और तालिबान के बीच शांति को लेकर होने वाली बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्‍म हो गई. वहीं भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान सैनिकों को हरसंभव मदद देने की अपील की है. भारत ने पुराने वादों को याद दिलाते हुए कहा कि इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए अफ़गानिस्तान की मदद करने का वादा अमेरिका को निभाना चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैय्यद अकबरुद्दीन ने संयुक्त राष्ट्र की अफगानिस्तान में चल रहे सहायता मिशन पर कहा कि क्षेत्र में संवैधानिक प्रक्रियाओं, राजनीतिक जनादेश और लोकतांत्रिक तरीके से ही शांति स्थापित की जा सकती है.

अफगानिस्‍तान के मसले पर सुरक्षा परिषद की तिमाही बैठक को संबोधित करते हुए अकबरुद्दीन ने आगाह किया कि यदि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने अफगानिस्तान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता नहीं दिखाई तो आतंकवाद को पनपने का मौका मिल जाएगा. अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खात्‍मे की लड़ाई में अफगान सुरक्षा बलों के प्रति की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए समर्थन की जरूरत है.

उन्‍होंने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अफगान नेतृत्‍व और तालिबान के बीच सीधी बातचीत का समर्थन करता है.

अकबरुद्दीन ने कहा, ‘यह क्षेत्र लंबे समय से आतंकवाद से ग्रसित है. इससे निपटने के लिए सभी देशों को योगदान देना चाहिए. अकबरुद्दीन ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना एक बार फिर उसपर निशाना साधा और आतंकवादियों को पनाह देने और बढ़ावा देने वाले देशों पर लगाम लगाने की जरूरत है.

उन्होंने कहा, ‘अफगानिस्तान की सीमा से परे भी आतंकवादी संगठनों को मदद मिल रही है. तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, अल-कायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए- मोहम्मद का नाम लेते हुए कहा कि इन संगठनों से निपटना होगा.’

बता दें कि कुछ दिनों पहले तालिबान के हमले में एक अमेरिकी सैनिक सहित 12 लोगों के मारे जाने के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान के साथ शांति वार्ता रद्द कर दी थी. उन्होंने रविवार को ट्वीट कर ये जानकारी दी थी.

उन्होंने ट्वीट किया था, ‘काबुल में एक हमला जिसमें हमारे महान सैनिकों और 11 अन्य लोग मारे गये. मैंने तुरंत बैठक रद्द कर दी और शांति वार्ता बंद कर दी. किस तरह के लोग हैं जो अपनी सौदेबाजी की स्थिति को मजबूत करने के लिए इतने सारे लोगों को मार देंगे?’

तालिबान द्वारा गुरुवार को काबुल में किए गए आत्मघाती हमले में एक अमेरिकी सैनिक समेत 12 लोगों के मारे जाने के बाद वार्ता रद्द की गई.