स्टडी का दावा- विमान में कोरोना से संक्रमित होने का खतरा काफी कम, जानें वजह

स्टडी का मकसद था कि उड़ान के दौरान COVID-19 से संक्रमित होने के खतरे का विश्लेषण करना, बोर्डिंग और डि बोर्डिंग के लिए स्ट्रैटेजी तैयार करना और अगर विमान में सवार कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया जाता है तब किस तरह से कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की जाए इसका पता लगाना.

अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा गुरुवार को जारी की गई एक स्टडी में बताया गया है कि विमान में एयरोसोल एक्सपोजर का खतरा काफी कम है. स्टडी के मुताबिक विमान में HEPA एयर फिल्टर के कारण कोरोनावायरस के संक्रमण की संभावनाएं घट जाती हैं. HERA एयर फिल्टर्स हर दो मिनट में कैबिन की हवा को साफ करते हैं और पूरे कैबिन में हवा का बहाव सुनिश्चित करते हैं.

यूनाइटेड एयरलाइंस महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित एयरलाइंस में से एक है. उन्होंने गुरुवार को ट्वीट कर इस स्टडी के बारे में जानकारी दी और कहा, “स्टडी के नतीजों में ये साफ है कि हमारे विमान में आपके कोविड-19 से संक्रमित होने की संभावनाएं बिल्कुल न के समान है (चाहे विमान पूरा क्यों न भरा हो).”

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इस स्टडी का मकसद था कि उड़ान के दौरान COVID-19 से संक्रमित होने के खतरे का विश्लेषण करना, बोर्डिंग और डि बोर्डिंग के लिए स्ट्रैटेजी तैयार करना और अगर विमान में सवार कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया जाता है तब किस तरह से कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग की जाए इसका पता लगाना.

इस स्टडी के साथ दावा किया गया है कि एयरोसोल एक्सपेरिमेंटल वेलिडेशन टेस्टिंग के लिए की गई ये सबसे बड़ी स्टडी थी. आठ दिनों तक चली इस स्टडी में इन-फ्लाइट और ग्राउंड, दोनों ही टेस्ट किए गए. स्टडी के मुताबिक लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान भी विमान में संक्रमित होने की संभावना काफी कम हैं.

स्टडी में बताया गया है कि विमान में संक्रमित होने की संभावना तब ज्यादा है जब कोई व्यक्ति संक्रमित व्यक्ति के पास वाली सीट पर बैठका हो. इसके बाद संक्रमित व्यक्ति की आगे और पीछे वाली पंक्ति में बैठने वाले लोगों की भी संक्रमित होने की संभावनाएं हैं.

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