तिब्‍बत को काठमांडू से जोड़ेगा 70KM लंबा रेल लिंक, जानें नेपाल ने चीन से क्‍यों किया ये सौदा

70 किलोमीटर लंबा यह रेल लिंक नेपाल के सबसे बड़े प्रोजेक्‍ट्स में से एक है. चीन की एक टीम ने प्रोजेक्‍ट से जुड़ी शुरुआती स्‍टडी कर ली है.

तिब्‍बत और नेपाल के बीच 70 किलोमीटर लंबा रेल लिंक बनेगा. इसके जरिए गिरोंग और काठमांडू को आपस में जोड़ा जाएगा. चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के नेपाल दौरे पर इस प्रोजेक्‍ट की डील हुई.

यह रेल लिंक हिमालय की गोद में फंसे देश के सबसे बड़े प्रोजेक्‍ट्स में से एक है. चीन की एक टीम ने प्रोजेक्‍ट से जुड़ी शुरुआती स्‍टडी कर ली है. यह चीन के ‘बेल्‍ट एंड रोड’ इनिशिएटिव का हिस्‍सा है. शी जिनपिंग इस इनिशिएटिव के जरिए ऐतिहासिक ‘सिल्‍क रोड’ को फिर धरातल पर उतारना चाहते हैं.

रेल लिंक के अलावा 28 किलोमीटर की एक सुरंग भी बनाएगी जाएगी. यह बीजिंग से काठमांडू की दूरी को कम करेगी.

भारत ने पिछले साल बिहार के रक्‍सौल से काठमांडू तक 130 किलोमीटर लंबी ट्रेन लाइन बिछाने का ऐलान किया था. इससे पहले 2016 में जब चीन ने नेपाल को अपने पोर्ट्स का एक्‍सेस दिया, तब भी भारत ने अपना ऑफर रखा था. दशकों से नेपाल कोलकाता पोर्ट का इस्‍तेमाल करता रहा है. 2016 में भारत ने उसे ट्रांजिट के लिए विशाखापटनम पोर्ट देने की पेशकश की थी.

भारत पर निर्भरता कम कर रहा नेपाल

नेपाल के व्‍यापार में भारत का हिस्‍सा दो-तिहाई है. वहां के तेल की पूरी सप्‍लाई भारत ही करता है. चीन के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाकर नेपाल अपने व्‍यापार पर भारत का प्रभुत्‍व खत्‍म करना चाहता है.

2015 और 16 में भारत के साथ सीमा पर ब्‍लॉकेज के चलते नेपाल में कई महीनों तक तेल और दवाओं की भारी कमी हो गई थी. इसी के बाद नेपाल ने चीन के साथ कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया है.

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