भारतीय-अमेरिकी लोगों में बढ़त बना रहे ट्रंप, फिर भी जो बिडेन को मिल रहा ज्यादा समर्थन: सर्वे

इंडियाजपोरा एंड एशियन अमेरिकन एंड पैसिफिक आइलैंडर (AAPI) डेटा के सर्वे से पता चला है कि ज्यादातर भारतीय-अमेरिकी अभी भी जो बिडेन के पक्ष में हैं, लेकिन ट्रंप भारतीय-अमेरिकी वोट बैंक की सेंधमारी की कोशिशों में लगे हैं.
Trump Joe Biden in Indian-American people Survey, भारतीय-अमेरिकी लोगों में बढ़त बना रहे ट्रंप, फिर भी जो बिडेन को मिल रहा ज्यादा समर्थन: सर्वे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय-अमेरिकी वोट बैंक में किसी भी रिपब्लिकन राष्ट्रपति के मुकाबले अच्छी पैठ बनाई है. बावजूद इसके एक सर्वे के अनुसार अभी भी ज्यादातर भारतीय-अमेरिकी मतदाता डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बिडेन के पक्ष में हैं.

इंडियाजपोरा एंड एशियन अमेरिकन एंड पैसिफिक आइलैंडर (AAPI) डेटा के सर्वे से पता चला है कि ज्यादातर भारतीय-अमेरिकी अभी भी पूर्व उपराष्ट्रपति बिडेन के पक्ष में हैं. वहीं सर्वे में पता चला है कि डोनाल्ड ट्रंप भारतीय-अमेरिकी वोट बैंक सेंधमारी की कोशिशों में लगे, जबकि, इस समुदाय में बिडेन की अच्छी खासी पहुंच है और पिछले कई सालों द्वपक्षीय संबंधों में उन्होंने एक अहम भूमिका निभाई है.

मालूम हो कि 77 साल के जो बिडेन पिछले महीने ही भारतीय मूल की कमला हैरिस का नाम उप-राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार के लिए ने घोषित किया था, जिसे अमेरिका में एक इतिहास की तरह देखा जा रहा है.

किसके के पक्ष में कितने भारतीय-अमेरिकी?

सर्वे के अनुसार, 66 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी वर्तमान में बिडेन के पक्ष में और 28 प्रतिशत ट्रंप के पक्ष में हैं, जबकि इस समुदाय के छह प्रतिशत लोगों ने अभी तय नहीं किया वो किसे समर्थन देंगे.

बता दें कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में, अमेरिका की पूर्व विदेश सचिव हिलेरी क्लिंटन को 77 प्रतिशत और ट्रंप को 16 प्रतिशत लोगों ने वोट दिया था. इससे पहले 2012 में, 84 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने बराक ओबामा को वोट दिया था.

इस तरह से बढ़ सकता है ट्रंप का समर्थन

AAPI डेटा के संस्थापक डॉ कार्तिक रामकृष्णन ने कहा कि अगर बाकी बचे 6 फीसदी भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोग भी ट्रंप को समर्थन दे दें, तो उनको मिलने वाला समर्थन 30 फीसदी तक पहुंच सकता है.

वहीं भारतीय-अमेरिकी कांग्रेस (अमेरिकी संसद) सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि डेमोक्रेट को इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि भरतीय-अमेरिकी समुदाय तक अपनी पहुंच कैसे बढ़ाई जाए, क्योंकि एक-एक वोट की गिनती होती और एक-एक वोट कीमती होता है.

“भारतीय-अमेरिकी वोट को नहीं कर सकते अनदेखा”

उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर पेन्सिलवेनिया, मिशिगन, फ्लोरिडा और उत्तरी कैरोलिना जैसे प्रमुख शहरों में बहुत से भारतीय-अमेरिकी हैं. यह वे शहर हैं, जहां मुकाबला भी काफ कड़ी है. राजा ने कहा कि हालांकि, आखिर में भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी में ही वापसी करेंगे.

हावर्ड लॉ स्कूल लेबर एंड वर्कलाइफ प्रोग्राम की विजिटिंग फेलो और डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी की पूर्व सीईओ सीमा नंदा ने कहा कि भारतीय-अमेरिकी सुमादाय का वोट ऐसा वोट है कि इस अनदेखा नहीं किया जा सकता है.

Related Posts