चीन के खिलाफ दो अमेरिकी सांसदों ने किया भारत का समर्थन, जम्मू-कश्मीर को लेकर भी जताई चिंता

उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) में अनुच्छेद 370 (Article 370) के तहत इसकी विशेष स्थिति को रद्द करने के बाद से यहां परिस्थितियां पूरे एक साल में भी सामान्य नहीं हैं.
support india against china, चीन के खिलाफ दो अमेरिकी सांसदों ने किया भारत का समर्थन, जम्मू-कश्मीर को लेकर भी जताई चिंता

दो प्रभावशाली अमेरिकी सांसद (US Congressman), जिनमें से एक डेमोक्रेट (Democrat) और एक रिपब्लिकन (Republican) है, उन्होंने चीन की आक्रामकता (Chinese Aggression) के खिलाफ भारत (India) का समर्थन किया है. लेकिन साथ ही चिंता जाहिर करते हुए यह भी कहा है कि जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir) में अनुच्छेद 370 (Article 370) के तहत इसकी विशेष स्थिति को रद्द करने के बाद से यहां परिस्थितियां पूरे एक साल में भी सामान्य नहीं हैं.

जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियों पर जताई चिंता

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट अध्यक्ष एलियॉट एंगल (Eliot Engel) और पैनल के रैंकिंग रिपब्लिकन मेंबर माइकल टी मैककॉल (Michael T McCaul) ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) को पत्र लिखकर अपना समर्थन देने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियों पर अपनी चिंता भी जाहिर की.

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उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को इस क्षेत्र में गंभीर सुरक्षा और आतंकवाद की चिंताओं का मुकाबला करने के लिए लिखा है, और कहा कि वे इन चिंताओं को दूर करने के लिए भारत के साथ काम करने के लिए तत्पर हैं. दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्रता के लिए साझा प्रतिबद्धताओं को कायम रखें.

21वीं सदी पर मजबूत प्रभाव

5 अगस्त को लिखे गए पत्र में दोनों अमेरिकी सांसदों ने लिखा, “विदेश मामलों की सदन समिति के अध्यक्ष और रैंकिंग सदस्य के रूप में, हम संयुक्त रूप से अमेरिका-भारत संबंधों के लिए मजबूत द्विदलीय समर्थन प्रदर्शित करने के लिए लिख रहे हैं. दोनों दलों के सदस्य भारत एवं अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों के 21वीं सदी पर मजबूत प्रभाव को समझते हैं. जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल फरवरी में कहा था, हमारे संबंध अब केवल एक साझेदारी नहीं हैं. बल्कि यह पहले से अधिक करीबी और मजबूत है.”

अमेरिकी सांसदों ने आगे लिखा, “यह मजबूत संबंध ऐसे समय में और अधिक महत्वपूर्ण हैं, जब भारत सीमा पर चीन के आक्रामक रुख का सामना कर रहा है. चीन का यह व्यवहार हिंद प्रशांत में चीन सरकार के अवैध कदमों और उसकी आक्रामकता का हिस्सा है”

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