पाकिस्‍तान पर मंडरा रहे ब्‍लैकलिस्‍ट होने के खतरे से क्‍यों घबराया हुआ है चीन?

चीन ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका FATF का राजनीतिकरण करने में लगे हैं. चीन के विदेश मंत्रालय का यह बयान बताता है कि पाकिस्‍तान में उसने जो अरबों डॉलर का निवेश किया है, उसे अब वो खतरे में दिखाई दे रहा है.

नई दिल्‍ली: फ्रांस की राजधानी पेरिस में फाइनेंशियल एक्‍शन टास्‍क फोर्स (FATF) की मीटिंग में पाकिस्‍तान को 2020 तक ग्रे लिस्‍ट में रखे जाने के फैसले पर चीन भड़क गया है.

चीन ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका FATF का राजनीतिकरण करने में लगे हैं. चीन के विदेश मंत्रालय का यह बयान बताता है कि पाकिस्‍तान में उसने जो अरबों डॉलर का निवेश किया है, उसे अब वो खतरे में दिखाई दे रहा है.

चीन का बयान बताता है कि वह किस तरह दुनिया में पाकिस्‍तान के नैरेटिव को आगे बढ़ा रहा है, जबकि सच यह है कि FATF ने इमरान खान सरकार को आतंकी नेटवर्क खत्‍म करने के लिए जो गाइडलाइंस जारी की थी, उनमें से किसी भी वह खतरा नहीं उतरा.

क्‍यों परेशान है चीन?

चीन ने चाइना-पाकिस्‍तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) में अरबों डॉलर का निवेश कर रखा है. चीन वैसे भी कंगाल पाकिस्‍तान को समय-समय पर आर्थिक मदद देता रहता है, ऐसे में अगर FATF ने अगले साल पाकिस्‍तान को ब्‍लैकलिस्‍ट कर दिया तो चीन का निवेश डूब जाएगा. इतना ही नहीं, अंतर्राष्‍ट्रीय संस्‍थाओं और देशों से पाकिस्‍तान को कर्ज लेने में दिक्‍कत होगी.

अक्‍टूबर 2019 में ब्‍लैकलिस्‍ट होने से क्‍यों बच पाकिस्‍तान?

पाकिस्तान FATF में चीन, मलेशिया और तुर्की के समर्थन के चलते ब्‍लैकलिस्‍ट होने से बच गया, लेकिन उसके ये सारे दोस्‍त मिलकर भी उसे ग्रे लिस्‍ट से नहीं बचा सके. FATF ने जिस तरह से पाकिस्‍तान को चेतावनी दी है, उससे स्‍पष्‍ट है कि अगर उसने आतंकवाद के खिलाफ ठोस एक्‍शन लेकर नहीं दिखाया तो आने वाले समय में चीन और तुर्की भी उसे ब्‍लैकलिस्‍ट होने से नहीं बचा सकेंगे.

अगले साल ब्‍लैकलिस्‍ट हो सकता है पाकिस्‍तान

FATF अगले साल फरवरी में पाकिस्तान को ब्‍लैकलिस्‍ट में डाला सकता है. आतंक के खिलाफ पर्याप्त कदम नहीं उठाने के कारण आने वाले कुछ सालों में उसके लिए इस लिस्ट से निकल पाना असंभव है. FATF ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला था और 27 पॉइंट का ऐक्शन प्लान देते हुए एक साल का समय दिया था. इसमें मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी संगठनों को फंडिंग रोकने के उपाय शामिल थे.

FATF की ग्रे और ब्‍लैकलिस्‍ट में आने का मतलब है क्‍या

FATF का काम आतंकी संगठनों की फंडिंग को रोकने के लिए नियम बनाकर उन्‍हें लागू कराना है. इस संस्था का गठन 1989 में किया गया था. FATF की ग्रे या ब्लैकलिस्ट में डाले जाने पर देश को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलना नामुमकिन हो जाता है. इस लिस्‍ट में नाम आने के बाद पाकिस्तान में विदेशी निवेश के रास्ते भी बंद होते जा रहे हैं और अगर पाकिस्‍तान ब्‍लैकलिस्‍ट हो गया तो निवेश और कर्ज दोनों के लिए तरस जाएगा.

FATF में ब्लैकलिस्ट होने के बाद वैश्विक वित्तीय संस्थाएं भी पाकिस्‍तान की रेटिंग कम कर देंगी. पाकिस्तान के लिए विश्व बैंक और IMF से पैसा लेना मुश्किल हो जाएगा. यहां तक पाकिस्‍तान के सबसे करीबी दोस्‍त चीन और सऊदी अरब चाहकर भी उसे पैसा नहीं दे पाएंगे.