अमेरिका का दावा- मार गिराया ईरानी ड्रोन, खाड़ी में बढ़ा तनाव

ईरान ने अपने किसी भी ड्रोन के मार गिराए जाने की घटना से इनकार किया है.

तेहरान: अमेरिका की ओर से ईरान का एक ड्रोन मार गिराए जाने के दावे के बाद खाड़ी क्षेत्र में शुक्रवार को तनाव बढ़ गया. अमेरिका ने कहा कि हरमुज जलडमरूमध्य के प्रवेश पर अमेरिकी नौसैन्य पोत के लिए खतरा पैदा होने के बाद ईरान के ड्रोन को मार गिराया गया.

ऐसा माना जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच घटी कई गंभीर घटनाओं के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना की यह पहली कार्रवाई है.

पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता जोनाथन होफ्फमैन ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस बॉक्सर ने पोत एवं उसके चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह ‘रक्षात्मक कदम उठाया.’

उधर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में पोतों के संचालन के खिलाफ यह ईरान के उकसावे एवं शत्रुतापूर्ण हरकतों में से सबसे नयी घटना है.’

ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका अपने कर्मियों, संस्थाओं एवं हितों की रक्षा का अधिकार रखता है. साथ ही उन्होंने सभी देशों से ईरान की इस हरकत की निंदा करने की भी अपील की जिसके बारे में उनका कहना है कि यह नौवहन एवं वैश्विक वाणिज्य की स्वतंत्रता को बाधित करने का ईरान का प्रयास है.

लेकिन ईरान ने अपने किसी भी ड्रोन के मार गिराए जाने की घटना से इनकार किया है.

संवाद समिति ‘तस्नीम’ के मुताबिक सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबुलफजल शेकार्ची ने ट्रंप के बयान को ‘निराधार एवं भ्रामक दावे’ बताया.

संवाद समिति ने उनके हवाले से कहा, ‘अमेरिकी यूएसएस बॉक्सर के साथ किसी झड़प की कोई खबर नहीं है.’

ईरान के विदेश उपमंत्री अब्बास अरागची ने ट्वीट किया, ‘हरमुज जलडमरूमध्य या कहीं भी हमारा कोई ड्रोन नहीं मार गिराया गया है. मुझे फिक्र है कि यूएसएस बॉक्सर ने कहीं गलती से अपना ही ड्रोन तो नहीं मार गिराया.’

जाहिर तौर पर यह मुकाबला ऐसे समय में देखने को मिल रहा है जब ईरान ने रविवार को जब्त किए एक ‘विदेशी टैंकर’ और उसके चालक दल के 12 सदस्य को ईंधन की कथित तौर पर तस्करी करने के लिए गिरफ्तार किए जाने का बचाव किया है.

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इससे पहले क्षेत्र में कई टैंकरों में विस्फोटक लगाने और अन्य कई घटनाओं को अंजाम देने का आरोप ईरानी बलों पर लगा है जिसके बारे में अमेरिका का कहना है कि यह सीरिया और यमन में ईरान के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है.