चीनी टेलिकॉम कंपनी ‘हुवावे’ पर सख्त हुए ट्रंप, इस वजह से नहीं खरीद सकेगी अमेरिकी टेक्नोलॉजी

अमेरिका और चीन का व्यापारिक युद्ध कड़वा हो चला है. अब ट्रंप की गाज़ दुनिया की सबसे बड़ी टेलिकॉम उपकरण कंपनी हुवावे पर गिरी है.

दुनिया की सबसे बड़ी टेलीकॉम उपकरण निर्माता कंपनी हुवावे पर अमेरिका ने नकेल कस दी है. हुवावे चीनी कंपनी है और चीन अमेरिका के साथ लंबे वक्त से ट्रेड वॉर यानि व्यापारिक युद्ध में उलझा है. ऐसे में अंदेशा था कि हुवावे पर कोई सख्त फैसला ट्रंप की ओर से आ सकता है.

बताया जा रहा है कि जासूसी के खतरे को देखते हुए ट्रंप सरकार ने हुवावे को एनटिटी लिस्ट में डाला है जिसके बाद हुवावे यूएस की कंपनियों से तकनीक नहीं खरीद सकेगी. एक आदेश के मुताबिक अमेरिकी कंपनियां भी उन फर्मों के टेलीकॉम उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करेंगी जिनसे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो. इस आदेश में किसी देश या कंपनी का नाम नहीं लिखा है मगर अमेरिका पहले से ही हुवावे पर टेढ़ी नज़र रखे हुए है. उसने कंपनी के उपकरणों से जासूसी का खतरा बताया था. अपने सहयोगी देशों से भी कहा था कि वो 5g सेवाओं में हुवावे के नेटवर्क का इस्तेमाल ना करें.

अमेरिका के वाणिज्य सचिव विल्बर रॉस ने इस मौक पर कहा कि ट्रंप नहीं चाहते कि दूसरे देशों की कंपनियां अमेरिकी तकनीक के इस्तेमाल से राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से सेंधमारी करें.

उधर हुवावे ने तमाम आरोपों को खारिज करके कहा कि वो अमेरिका से बातचीत के ज़रिए सारी चिंताओं को दूर करने को तैयार है.

दीगर है कि अमेरिकी-चीनी ट्रेड वॉर के बीच ऐसे फैसले किसी को नहीं चौंका रहे हैं. ट्रंप ने अपने देश का आयात-निर्यात बराबर करने के लिए कई कड़े फैसले करके पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है. अमेरिका ने 10 मई से 200 अरब डॉलर के चीनी आयात पर लगनेवाले 10% शुल्क को 25% तक बढ़ा दिया है. उधर चीन ने भी 60 अरब डॉलर के अमेरिकी निर्यात पर 1 जून से शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया है.

इससे पहले हुवावे के साथ अमेरिकी सरकार की कड़वाहट तब बढ़ गई थी जब कनाडा में कंपनी की सीएफओ मेंग वांगझू को गिरफ्तार करा दिया गया था. मेंग हुवावे के संस्थापक की बेटी हैं. इसके बाद चीन ने भी कनाडा के 2 नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया गया था.