रुपये पर बढ़ा अमेरिका का भरोसा, चीन की निगरानी करते रहेंगे ‘अंकल सैम’

अमेरिका की मुद्रा निगरानी सूची में चीन के साथ-साथ जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, मलेशिया, वियतनाम और सिंगापुर भी हैं.

नई दिल्‍ली: अमेरिका के राजस्व विभाग ने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की अपनी मुद्रा निगरानी सूची में से भारत को हटा दिया है. अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक और विनिमय दर नीतियों पर अमेरिकी कांग्रेस में पेश अपनी अर्धवार्षिक रिपोर्ट में, विभाग ने मंगलवार को भारत और स्विट्जरलैंड को संभावित संदेहास्पद विदेशी मुद्रा विनिमय नीतियों वाले देशों की अपनी पिछली मुद्रा निगरानी सूची से हटा दिया है.

अमेरिका ने चीन, जापान, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और दक्षिण कोरिया के साथ भारत को भी पिछले साल अक्टूबर में अपनी द्विवार्षिक मुद्रा निगरानी सूची में शामिल किया था. अमेरिका ने हालांकि चीन को अभी भी इस सूची में रखा हुआ है. उन्होंने चीन से लगातार कमजोर मुद्रा से बचने के लिए जरूरी कदम उठाने का आग्रह किया है. किसी देश की विनिमय दर नीतियों पर जरा भी संदेह होने पर अमेरिका उसे इस सूची में डाल देता है.

रुपये, रुपये पर बढ़ा अमेरिका का भरोसा, चीन की निगरानी करते रहेंगे ‘अंकल सैम’

लगातार कमजोर हो रही चीन की मुद्रा

अमेरिका के राजस्व विभाग के सचिव स्टीवन मनचिन ने एक बयान में कहा, “राज्य विभाग चीन से लगातार कमजोर हो रही मुद्रा से बचने के लिए जरूरी कदम उठाने का आग्रह कर रहा है.”

विभाग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मुद्रा निगरानी सूची में चीन के साथ-साथ जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, मलेशिया, वियतनाम और सिंगापुर भी हैं.

भारत के लिए क्‍या मतलब?

अमेरिका के इस कदम को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्‍वास के रूप में देखा जा सकता है. वहां के वित्‍त मंत्रालय ने कहा भी है कि भारत सरकार के कुछ कदमों की वजह से मौद्रिक नीति को लेकर उसकी आशंकाएं दूर हो गई हैं. एक रिपोर्ट में मंत्रालय ने कहा है कि भारत तीन क्राइटेरिया में से सिर्फ एक पर ही प्रतिकूल रहा. रिपोर्ट में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार का भी हवाला दिया गया है.

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