भारत-चीन सीमा पर तनाव घटने की उम्मीद जगी, अगले दो-तीन दिन अहम

भारतीय विदेश मंत्रालय (Indian Ministry of External Affairs) में ईस्ट एशिया मामलों को देखने वाले संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव और चीन के विदेश मंत्रालय में एशिया मामलों के डायरेक्टर जनरल Wu Jianghao के बीच वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए बातचीत हुई.
Indian Ministry of External Affairs, भारत-चीन सीमा पर तनाव घटने की उम्मीद जगी, अगले दो-तीन दिन अहम

पिछले कई हफ्तों से भारत-चीन सीमा (Indi-China Border) पर दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं. इस तनाव को कम करने के लिए शुक्रवार को दिल्ली और बीजिंग के राजनयिकों का आमना-सामना हुआ. भारतीय विदेश मंत्रालय (Indian Ministry of External Affairs) में ईस्ट एशिया मामलों को देखने वाले संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव और चीन के विदेश मंत्रालय में एशिया मामलों के डायरेक्टर जनरल Wu Jianghao के बीच वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए बातचीत हुई.

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इस दौरान दोनों तरफ से कई राजनियक मौजूद थे और दोनों देशों के दूतावास भी लगातार सक्रिय थे. दोनों पक्षों ने सीमा पर जारी तनाव को लेकर चर्चा की और प्रधानमंत्री मोदी और प्रेसिडेंट जिनपिंग के दिशानिर्देशों के मुताबिक इसे हल करने का फैसला किया.

सीमा पर तनाव के बाद ये अबतक की सबसे उच्च स्तरीय बातचीत है. हालांकि दोनों देशों के विदेश मंत्रालय के तरफ से लगातार बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने और सीमा पर शांति और स्थिरता बहाल करने पर जोर दिया जा रहा था.

6 जून को कमांडर स्तर की मुलाकात

दोनों देशों के राजनयिकों के बीच हुई बातचीत से इसकी उम्मीद बढ़ गयी है कि 6 जून को कमांडर स्तर की मुलाकात में कुछ समाधान निकल सकता है. भारत की तरफ से 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह लद्दाख इलाके में चुशुल के पास करीब 9.30 बजे चीन की सेना के दक्षिणी शिनजियांग मिलट्री डिस्ट्रिक्ट के कमांडर के साथ मुलाकात करेगें.

कमांडर स्तर की इस बातचीत में जमीनी स्तर पर दोनों सेनाओं के वास्तविक पोजीशन को लेकर चर्चा होगी और चीन की सेना को पुरानी स्थिति बहाल करने के लिए कहा जाएगा.

जानकारों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुए दो अनौपचारिक सम्मेलनों- वुहान स्पिरिट और चेन्नई कनेक्ट के तहत सीमा विवाद को हल करने का जो फॉर्मूला तय किया गया है, सेनाओं के ब्रिगेड कमांडर स्तर की बातचीत भी उसी में शामिल है.

लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह जवाबी कार्रवाई (Counter Insurgency) में एक्सपर्ट के तौर पर जाने जाते हैं. उन्होंने पिछले साल अक्टूबर महीने में 14वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग की पोस्ट संभाली थी.

इससे पहले लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह भारतीय सेना में कई अहम कार्यभार संभाल चुके हैं. इसमें डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलिजेंस, डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस और डायरेक्टर जनरल ऑफ ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स एंड स्ट्रैटेजिक मूवमेंट के पद शामिल हैं.

पूर्वी लद्दाख बॉर्डर पर क्या है गतिरोध

ये गतिरोध 5 मई को चीनी सैनिकों के एक दल ने पूर्वी लद्दाख बॉर्डर में पांगोंग के पास शुरू किया. जिसके कुछ समय बाद चीन ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की दो कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड गालवान वैली और पांगोंग त्सो के पेट्रोलिंग पॉइंट पर तैनात कर दीं. इनमें लगभग 8 हजार सैनिक और आर्टिलरी सपोर्ट शामिल थे.

दरअसल, चीन अभी उसके सहयोगी पाकिस्तान से कराकोरम राजमार्ग द्वारा खंजरब दर्रे से जुड़ा हुआ है. लेकिन चीन तिब्बत को गिलगित बाल्टिस्तान के साथ बेहतर ऑल वेदर रोड के जरिए जोड़ना चाहता है. इसके पीछे चीन का मकसद है कि पाकिस्तान तक उसके पास हर मौसम में काम आने वाली सड़कें हों, ताकि चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पूरे साल उपयोग में लिया जा सके.

चीन ने पहले ही गिलगित की शक्सगाम घाटी से एक सड़क का निर्माण किया है जो सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर-पश्चिम में स्थित है. पाकिस्तान ने विवादित 1963 के सीमा समझौते में लगभग 5,163 वर्ग किमी की शक्सगाम घाटी चीन के हवाले कर दी थी. अगर चीनी दौलत बेग ओल्डी में सड़क बना लेते हैं, तो वे भारत के कई पॉइंट्स पर दबाव डाल सकते हैं और इसका फायदा पाकिस्तान भी उठा सकता है.

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