ईरान, बासमती चावल और कच्चा तेल, पढ़िए एक दिलचस्प कनेक्शन

ईरान के विदेश मंत्री ने हजार साल के संबंधों का हवाला देते हुए भारत के अमेरिका पर रुख को लेकर चिंता जताई.

ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद जरीफ ने एक पत्रकार से बात करते हुए कहा ‘एक हजार सालों के मजबूत पारस्परिक संबंधों को देखते हुए ईरान को उम्मीद थी कि भारत अमेरिका के दबाव और दादागिरी का जवाब अधिक मजबूती से देगा.’

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा ‘ये ऐसे संबंध हैं जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय कारणों, राजनैतिक या आर्थिक समीकरणों के कारण नहीं तोड़ा जा सकता. भारत ने प्रतिबंधों पर सही जवाब दिए हैं जो कि प्रशंसनीय हैं लेकिन मित्र होने के नाते उसे और लचीला होना चाहिए. अमेरिका के दबाव को आपको सख्ती से नकारना चाहिए क्योंकि वह हाईस्कूल के लड़के की तरह बदमाशी कर रहा है. भारत भी हमसे तेल न खरीदने के प्रतिबंध के चलते परेशान हो रहा है.’

जरीफ ने दोनों देशों के बीच आयात-निर्यात संबंधों पर बोलते हुए कहा ‘अगर आप हमसे कच्चा तेल नहीं ले सकते तो हम भारतीय चावल खरीदने में असमर्थ हैं.’ बता दें कि भारत और ईरान के बीच समझौते के तहत भारत ईरान से तेल खरीदता है और बदले में ईरान को चावल व दवाएं निर्यात करता है. भारतीय बासमती चावल ईरान में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है.

जरीफ ने पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा और टेक्सास में उनके द्वारा ट्रंप के लिए वोट मांगने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन मुद्दों पर दूरदृष्टि से काम लेना जरूरी होता है. मोहम्मद जावेद जरीफ ने दक्षिण-पूर्वी ईरान पर स्थित चाबहार पोर्ट के विकास की धीमी गति पर भी चिंता जताई.

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