अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध हुआ तो? पूरी दुनिया में आसमान पर होंगे तेल के दाम

गुरुवार को कच्‍चे तेल की कीमत प्रति बैरल 65 डॉलर तक पहुंच गई.

नई दिल्‍ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की आशंका बढ़ती जा रही है. अमेरिका के एक जासूसी ड्रोन को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्डस कॉर्प्स (IRGC) ने मार गिराया, जिसके बाद तनाव चरम पर पहुंच गया है. पिछले कुछ महीनों में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने की बजाय बढ़ता गया है, जिसका असर कच्‍चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला है.

गुरुवार को जैसे ही अमेरिकी ड्रोन मार गिराने की खबर आई, कच्‍चे तेल की कीमतों में इजाफा होना शुरू हो गया. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि ‘ईरान ने बड़ी गलती कर दी है!’ इसके बाद कच्‍चे तेल के दामों में 3 प्रतिशत से ज्‍यादा की बढ़ोतरी देखी गई. गुरुवार को कच्‍चे तेल की कीमत प्रति बैरल 65 डॉलर तक पहुंच गई.

पूरी दुनिया में सबसे ज्‍यादा तेल की खपत अमेरिका करता है. बुधवार को फेडरल रिजर्व ने मुख्‍य ब्‍याज दर में कटौती के संकेत दिए हैं. अमेरिकी क्रूड इनवेंट्री में गिरावट से भी तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव से मध्‍य-पूर्व में युद्ध का खतरा बढ़ गया है.

क्‍यों महत्‍वपूर्ण है मध्‍य-पूर्व इलाका?

दुनिया को कच्‍चे तेल की जरूरत का 20 फीसदी मध्‍य-पूर्व से आता है. वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव पिछले सप्ताह ओमान की खाड़ी में तेल के दो टैंकरों पर हमले होने और ईरान की 2015 परमाणु समझौते को ना मानने की धमकी देने के बाद बढ़ गया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल मई में परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर दिया था और इस्लामिक गणराज्य पर ऊर्जा और आर्थिक प्रतिबंध दोबारा लगा दिए थे. ईरान के खतरों के बहाने अमेरिका ने पिछले कुछ सप्ताहों में क्षेत्र में भारी मात्रा में सेना तैनात कर दी है. पेंटागन ने सोमवार को मध्य एशिया में 1,000 अन्य सैनिकों को तैनात करने की घोषणा की थी.

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