ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने बाद, क्या होगा मसूद अजहर के साथ?

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर हुए आतंकी हमले में जैश का नाम सामने आने के बाद मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट करार दिया गया है.

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर हुए आतंकी हमले में जैश का नाम सामने आने के बाद फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन ने अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन चीन ने मार्च में चौथी बार इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी, लेकिन अब अपने पहले के रुख के उलट चीन ने मसूद अजहर ग्लोबल आतंकवादी घोषित किया है.

बता दें किसी भी व्यक्ति को ग्लोबल आतंकी घोषित करने का फैसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हवाले होता है. इसमें अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस पांच स्थाई सदस्यों समेत दस अस्थाई सदस्य शामिल हैं. किसी को वैश्विक आतंग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिए सभी स्थाई सदस्यों की स्वीकृति अहम है.

इस दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समिति प्रस्ताव 1267 के तहत ISIL लिस्ट में उस आतंकी गतिविधि वाले व्यक्ति का नाम दर्ज करना होता है. लिस्ट में शामिल होते ही वो व्यक्ति ग्लोबल टेररिस्ट घोषित हो जाता है. ग्लोबल टेररिस्ट की लिस्ट में आते ही किसी व्यक्ति पर ये तीन तरह प्रतिबंध लगाए जाते हैं…

  • जिस देश में उस व्यक्ति की संपत्ति होगी उस देश की बदौलत उसे तुरंत जब्त कर लिया जाएगा. साथ ही इस बात की पुष्टि की जाती है, कि ग्लोबल टेररिस्ट घोषित हुए व्यक्ति को किसी तरह की आर्थिक सहायता न दी जाए.
  • वो टेररिस्ट जिस भी देश में होगा वहां उसे किसी तरह की यात्रा की यात्रा करने से रोका जाएगा साथ ही दूसरे देशों में उसके प्रवेश पर पाबंदी होगी.
  • ऐसे व्यक्ति को किसी भी तरह के हथियार मुहैया नहीं करवाए जाएंगे. हथियारों की आपूर्ति के साथ खरीद-फरोख्त भी प्रतिबंधित होगी. इसमें हर तरह के छोटे बड़े हथियार शामिल हैं. इसके अलावा हथियार बनाने में काम रही टेक्नोलॉजी और सामान उपलब्ध करवाए जाने पर भी बैन लगाया जाता है.

ग्लोबल टेररिज्म पर बने नियमों के मुताबिक इस तरह के बैन लगना जरूरी है, लेकिन कुछ मामलों पर ऐसा नहीं होता है. जैसे दाउद इब्राहिम और हाफिज सईद के ग्लोबल टेररिस्ट घोषित होने के बाद भी वो पाकिस्तान में हैं. इसके अलावा दोनों के विदेश जाने की खबरें आती रहती हैं.