भारत का डर दिखाकर बचाई जा रही जनरल बाजवा की कुर्सी, जानें क्‍या है इमरान का प्‍लान

कुछ महीने पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा पर भरोसा जताते हुए उनका कार्यकाल अगले तीन साल के लिए बढ़ा दिया था.
Pakistan Army chief General Bajwa, भारत का डर दिखाकर बचाई जा रही जनरल बाजवा की कुर्सी, जानें क्‍या है इमरान का प्‍लान

पाकिस्‍तान सरकार अपने सेना प्रमुख जावेद बाजवा को नहीं हटाना चाहती है. भारत का डर इसकी एक बड़ी वजह है. इमरान सरकार ने सेना प्रमुख बाजवा को रोकने के लिए सेना नियमों में संशोधन भी कर दिया है. इमरान ये अच्छी तरह समझते हैं कि जम्‍मू-कश्‍मीर और भारत-पाकिस्‍तान सीमा पर भारत के खिलाफ रणनीति बनाने में बाजवा माहिर है. पाकिस्तान को लगता है कि बाजवा के जाने से सीमा पर उसकी पकड़ कमजोर हो जाएगी.

‘नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं’

इसलिए पाकिस्‍तान सरकार ने सेना के नियमों 255 में संशोधन कर दिया है. इसका मकसद है कि सेना प्रमुख से संबंधित मामले में अदालत की अड़चनों को दूर किया जा सके. पाकिस्‍तान सरकार ने यह कदम तब उठाया जब सुप्रीम कोर्ट ने बाजवा के कार्यकाल बढ़ाने के फैसले को निलंबित कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि सेना के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

‘बौखलाहट में उठाया था कदम’

कुछ महीने पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा पर भरोसा जताते हुए उनका कार्यकाल अगले तीन साल के लिए बढ़ा दिया था. उन्‍होंने ये कदम जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के सख्त रुख और अनुच्छेद 370 हटाने के बाद बौखलाहट में उठाया था.

जम्मू-कश्मीर में बने हालात में पाकिस्तान के इस कदम को बेहद अहम माना गया था. उनका यह सेवा विस्‍तार रिटायर होने के म‍हज तीन महीने किया गया था. पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने तब यह कहा था देश की अमन और शांति के लिए बाजवा के कार्यकाल को बढ़ाया गया है.

‘बाजवा को LoC का लंबा अनुभव’

29 नवंबर, 2016 को बाजवा ने सेवानिवृत्‍त जनरल राहिल शरीफ का स्‍थान लिया था. बाजवा के नाम पर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने मुहर लगाई थी. कश्‍मीर मुद्दों के खास तौर पर भारत से लगी नियंत्रण रेखा (LoC) का बाजवा को लंबा अनुभव है.

बाजवा पाकिस्‍तान सेना मुख्‍यालय जीएचक्‍यू में जिस पद आसीन थे उसी पद पर राहील शरीफ भी थे. इस सीट से पाकिस्‍तान सेना की सबसे बड़ी विंग 10 कॉपर्स को कंट्रोल किया जाता है. इसकी जिम्‍मेदारी LoC की सुरक्षा है.

‘पाक की बड़ी जरूरत बन चुके बाजवा’

अभी भी पाकिस्‍तान कश्‍मीर मुद्दे को लेकर भारत से मात खाता आया है. यही वजह है कि सीमा पर भारत और पाकिस्‍तान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पाकिस्‍तान सरकार के लिए बाजवा एक बड़ी जरूरत बन चुके हैं. इमरान सरकार को लगता है कि सीमा के हालात से निपटने के लिए बाजवा के अनुभव का लाभ लिया जा सकता है.

कमर जावेद बाजवा को कश्मीर मुद्दों का जानकार माना जाता है. बाजवा के पास भारत के साथ लगी नियंत्रण रेखा का भी लंबा अनुभव है. बाजवा 1982 में पाकिस्तानी सेना की सिंध रेजिमेंट में कमीशन होकर पहुंचे थे. बाजवा को 2011 में हिलाल-ए-इम्तियाज से नवाजा जा चुका है.

‘कॉर्प-10 का किया नेतृत्व’

बाजवा ने पाकिस्तान की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण कॉर्प-10 का भी नेतृत्व किया है. यह कॉर्प पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में तैनात है. बाजवा ने कश्मीर और उत्तरी इलाकों में लंबे समय तक बतौर सेनाधिकारी के तौर पर सेवा दी है, इसलिए उन्हें इन इलाकों की खासी समझ है. कांगों में शांति मिशन के दौरान भी ब्रिगेडियर रहते हुए बाजवा ने अपनी सेवाएं दीं.

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