ग्लोबल इकोनॉमी पर कोरोना की मार, आर्थिक संकट से निपटने में लग सकते हैं पांच साल : WHO

कारमेन रेनहार्ट (Carmen Reinhart) ने यह भी बताया कि महामारी की वजह से सामने आई आर्थिक मंदी (economic downturn) अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय तक चल सकती है. उन्होंने कहा कि अमीर देशों में आर्थिक संकट की मार सबसे ज्यादा गरीबों पर पड़ेगी.
five years in global economic recovery, ग्लोबल इकोनॉमी पर कोरोना की मार, आर्थिक संकट से निपटने में लग सकते हैं पांच साल : WHO

दुनियाभर में तेजी के साथ फैल रहे जानलेवा कोरोनावायरस ने वैश्विक अर्थव्यवस्था (global economy) को बुरी तरह से प्रभावित किया है. इस महामारी ने दुनिया को एक ऐसे समय में अपनी चपेट लिया है जब ग्लोबल इकोनॉमी पहले ही सुस्ती से जूझ रही थी. इसमें सुधार को लेकर विश्व बैंक (World Bank) ने फिर एक भविष्यवाणी की है.

विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री कारमेन रेनहार्ट ने कहा कि कोरोना महामारी (Coronavirus Pandemic) से पैदा हुए ग्लोबल आर्थिक संकट से उबरने में पांच साल लग सकते हैं. उन्होंने कहा कि हालांकि लॉकडाउन से जुड़े प्रतिबंधों को काफी हद तक हटा दिया गया है और कई देशों में आर्थिक गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ठीक होने में पांच साल लग सकते हैं.

आर्थिक मंदी से गरीब देश होंगे बेहद प्रभावित

रेनहार्ट (Carmen Reinhart) ने यह भी बताया कि महामारी की वजह से सामने आई आर्थिक मंदी (economic downturn) अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय तक चल सकती है. कुछ देशों में आर्थिक मंदी दूसरे देशों की तुलना में लंबे समय तक चल सकती है और यह स्थिति असमानताओं को बढ़ाएगी.

उन्होंने कहा कि अमीर देशों में आर्थिक संकट की मार सबसे ज्यादा गरीबों पर पड़ेगी, तो वहीं दुनिया के गरीब देशों में शामिल देश, अमीर देशों की तुलना में ज्यादा प्रभावित होंगे. बीस सालों में पहली बार वैश्विक गरीबी की दर बढ़ेगी.

भारत को लेकर क्या कहा था विश्व बैंक ने

कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) की वजह से दुनियाभर में लोगों की आर्थिक स्थिति पर काफी बुरा असर पड़ा है. इसके चलते वस्तुओं और सेवाओं की मांग और आपूर्ति दोनों पर असर पड़ा है.

पिछले महीने भारत की अर्थवयवस्था को लेकर विश्व बैंक ने कहा था कि भारत को आर्थिक मंदी को कम करने के लिए सुधारों को जारी रखने की जरूरत है. कोविड-19 के बाद भारत को स्वास्थ्य, श्रम, भूमि, कौशल और वित्त जैसे प्रमुख क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधारों की जरूरत है.

अमीर देशों को करनी होगी गरीब देशों की मदद

इसी के साथ वर्ल्ड बैंक के प्रसिडेंट डेविड मालपास (David Malpass) ने भी ये चेतावनी दी थी कि कोरोना महामारी के चलते दुनियाभर में करीब 100 मिलियन यानी 10 करोड़ लोगों को भारी गरीबी का सामना करना पड़ सकता है.

उन्होंने कहा कि ऐसे में अमीर देशों को गरीब देशों की मदद के लिए आगे आना पड़ेगा, तभी इतनी बड़ी आबादी को प्रभावित होने से कुछ हद तक बचाया जा सकेगा. हालांकि ऐसा करने की आड़ में अमीर देश गरीब देशों का शोषण भी कर सकते हैं.

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