aircraft Air Force One, VIDEO : अमेरिकी राष्ट्रपति का विमान एक अभेद्य किला, जहां बैठे-बैठे तबाही मचा सकते हैं ट्रंप
aircraft Air Force One, VIDEO : अमेरिकी राष्ट्रपति का विमान एक अभेद्य किला, जहां बैठे-बैठे तबाही मचा सकते हैं ट्रंप

VIDEO : अमेरिकी राष्ट्रपति का विमान एक अभेद्य किला, जहां बैठे-बैठे तबाही मचा सकते हैं ट्रंप

एयरफोर्स वन में डोनाल्ड ट्रंप के पास हमेशा लेदर बैग मौजूद रहता है. जिसे न्यूक्लियर फुटबॉल भी कहते हैं. इस बैग में एटम बम का वो बटन है जिसे ट्रंप 45 हजार फीट की ऊंचाई से भी दबा सकते हैं.
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भारत 24वां देश है, जिसके दौरे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आ रहे हैं. ट्रंप ने तीन साल पहले सत्ता संभाली थी. राष्ट्रपति ट्रंप ने अब तक 23 देशों का दौरा किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये सभी दौरे एयरफोर्स वन नाम के विमान से किए हैं. ट्रंप जहां भी जाते हैं वहां एयरफोर्स वन चर्चा का विषय बन जाता है. एयरफोर्स वन की ऐसी कई खासियतें हैं जो उसे अलहदा बनाती हैं. आज हम आपको एयरफोर्स वन के कई हैरान कर देने वाले राज बताने जा रहे हैं.

ट्रंप का विमान एयरफोर्स वन किसी अजूबे से कम नहीं है. इस विमान ने इतिहास के कई दौर देखे हैं. विशालकाय जंबो जेट के अंदर वो बटन मौजूद है जो 45 हजार फीट की ऊंचाई से किसी भी मुल्क को तबाह कर सकता है. आसमान में भी एटम बम का बटन हमेशा ट्रंप के पास रहता है. प्रेसिडेंट की सुख-सुविधाओं का महल है एयरफोर्स वन. जिसे भेद पाना किसी भी दुश्मन के लिए नामुमकिन है.

एयरफोर्स वन में सबसे आगे राष्ट्रपति सुइट है जिससे ठीक लगा हुआ है राष्ट्रपति का ऑफिस. राष्ट्रपति के ऑफिस के ठीक पीछे मेडिकल ऑफिस है. इसके पीछे एक गैलरी है जिससे विमान के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाया जाता है. गैलरी की नीचे ट्रंप के साथ सफर करने वाला सीनियर स्टॉफ बैठता है. एयरफोर्स वन के एकदम बीच का हिस्सा कॉन्फेंस और डाइनिंग रुम है. और विमान के बांयी तरफ ऊपर की ओर वो ग्रेट डोर है जहां से ट्रंप एयरफोर्स में एंट्री और एग्जिट करते हैं.

बंद नहीं होता एयरफोर्स वन का इंजन

एयरफोर्स वन जब भी किसी देश में जाता है तो इसका इंजन बंद नहीं किया जाता. जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति किसी भी देश में मौजूद रहता है एयरफोर्स वन स्टैंड बाय पर खड़ा रहता है. अगर कोई भी अनहोनी घटी तो इसे हजारों फीट की ऊंचाई पर पहुंचने में कुछ ही मिनट लगेंगे.

साल 1945 में राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने पहली बार इस विशालकाय प्लेन का इस्तेमाल किया था. तब इसका नाम ‘सेक्रेड काउ’ था. राष्ट्रपति आइजनहावर के वक्त इसे नया नाम दिया गया एयरफोर्स वन. एयरफोर्स वन के पहले हिस्से में राष्ट्रपति आराम करते हैं, मीटिंग करते हैं. जबकि दूसरे हिस्से में उनकी सिक्योरिटी का पूरा इंतजाम होता है.

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विंग्स के नीचे गेस्ट सेक्शन है. उसके ठीक नीचे सिक्योरिटी सेक्शन और इसी से लगा हुआ है प्रेस सेक्शन. जहां मीडिया मौजूद रहती है. बांयी ओर गेस्ट सेक्शन के ठीक सामने ऑफिस स्टॉफ के रहने की जगह होती है. सिक्योरिटी सेक्शन के सामने दूसरा सिक्योरिटी सेक्शन होता है और विमान में सबसे नीचे की तरफ सपोर्ट क्रू स्टॉफ होता है.

फुटबॉल के मैदान से भी बड़ा है एयरफोर्स वन

इस जंबो जेट में ट्रंप अपना दरबार लेकर उड़ते हैं. यहीं से मिलिट्री स्ट्ट्रेजी बना सकते हैं. एयरफोर्स वन विमान फुटबॉल के मैदान जितना बड़ा है. ये 4 हजार वर्ग फीट से ज्यादा जगह में बनाया गया है. एयरफोर्स वन कई मंजिल का विमान होता है. जिसे छूना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.

मान लीजिए अगर किसी दुश्मने ने मिसाइल से हमला किया और वो एयरफोर्स वन से जा टकराई तो भी विमान को कुछ नहीं होगा. वो अपनी गति से चलता रहेगा. अगर किसी दुश्मन देश ने मिसाइल छोड़ी तो एयरफोर्स वन में वो रडार सिस्टम मौजूद है जो हर मिसाइल को लॉन्च होते ही पकड़ लेगा.

फिर विमान से इतनी ऊर्जा पैदा होगी कि मिसाइल करीब आते ही अपना रास्ता बदल लेगी. अगर किसी देश ने ट्रंप के प्लेन पर बैलेस्टिक मिसाइल या फिर क्रूज मिसाइल से भी हमला किया तो नाकाम रहेगा. रॉकेट तक का इस पर कोई असर नहीं होगा.

बुलंद दरवाजे जितना मजूबत विमान का शीशा

अगर कोई एयरफोर्स वन के शीशे पर निशाना लगाकर ट्रंप को मारना चाहे तो ये भी मुमकिन नहीं है. इस जंबो जेट का शीशा भी बुलंद दरवाजा जितना मजूबत है. अगर कोई दुश्मन प्लेन के लैंड करने के बाद ट्रंप पर हमला करना चाहे तो पलक झपकते ही उसका हर मंसूबा नाकाम हो जाएगा. एयरफोर्स वन में तैनात सुरक्षाकर्मी हर कोने से दुश्मन पर टूट पड़ेंगे. अमेरिका के राष्ट्रपति का बाल भी बांका नहीं होगा और दुश्मन जलकर राख हो जाएगा.

एयरफोर्स विमान के अंदर मिलिट्री बेस भी होता है और हर वो तकनीक जिससे दुश्मनों पर नजर रखी जा सकती है. वाई-फाई की कनेक्टिवटी से लैस एयरफोर्स वन में पूरे 80 फोन होते हैं. और हर फोन का अलग काम होता है. एक रंग के फोन से ट्रंप निर्देश देते हैं, जबकि दूसरे रंग के फोन से बाकी अधिकारी और सुरक्षाकर्मी बात करेंगे. कई फोन तो सिर्फ कॉल रिसिव करने के लिए लगे होते हैं.

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आसमान में रहकर भी ट्रंप का संपर्क वाशिंगटन से बना रहता है. एयरफोर्स वन की लंबाई 231 फीट है, जबकि विंग का साइड 195 फीट है. विमान के अंदर 70 यात्री और 26 क्रू मेंबर बैठ सकते हैं. इस विमान की स्पीड 1 हजार किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा होती है और एक बार में एयरफोर्स वन 12,550 किलोमीटर तक की उड़ान भर सकता है.

बिना रुके दुनिया का चक्कर लगा सकता है ट्रंप का विमान

अगर ट्रंप ने एक बार एयरफोर्स वन में उड़ान भरी तो वो दुनिया का चक्कर लगा सकते हैं वो भी बिना रुके. एक बार टंकी फुल की तो दुनिया के किसी भी हिस्से से सीधा वाशिंगटन जाकर रुकेगा एयरफोर्स वन. एयरफोर्स वन में लड़ाकू विमान जैसी सुविधा भी मौजूद है. लड़ाकू विमान हवा में फ्यूल भर सकते हैं.

ट्रंप के पास हमेशा लेदर बैग मौजूद रहता है. जिसे न्यूक्लियर फुटबॉल भी कहते हैं. इस बैग में एटम बम का वो बटन है जिसे ट्रंप 45 हजार फीट की ऊंचाई से भी दबा सकते हैं. और एक बार ये बटन दब गया तो परमाणु हमला हो जाएगा. इसीलिए तो एयरफोर्स वन को उड़ता वाशिंगटन भी कहा जाता है.

एयरफोर्स वन सिर्फ एक नाम नहीं है, एक कोड है जिसे अमेरिका के राष्ट्रपति की उड़ान के दौरान इस्तेमाल किया जाता है. ये अमेरिका का सरकारी कोड है जो सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति के सफर को सुरक्षित बनाने का काम करता है. ये विमान बोइंग 747-200बी सीरीज का विमान है जिसे पैसेंजर प्लेन नहीं बल्कि मिलिट्री विमान माना जाता है.

152 करोड़ की लागत से लगाए गए थे दो फ्रिज

एयरफोर्स वन में मेडिकल स्टॉफ भी हमेशा मौजूद होता है. इमरजेंसी के समय कुछ ही मिनटों में प्रेसिडेंट सूइट को ऑपरेशन थियेटर में बदला जा सकता है. ट्रंप के साथ उड़ने वाला करीब दो दर्जन क्रू स्टाफ भी एयरफोर्स वन में मौजूद रहता है. जो विमान के चप्पे चप्पे की निगरानी करता है.

कुछ दिनों पहले खबर आई थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए एयरफोर्स वन में दो रेफ्रिजरेटर लगाए जाने हैं. इन दो फ्रीज के लिए बोइंग कंपनी से कॉन्टैक्ट हुआ था. खबरों के मुताबिक, ट्रंप की सुविधा के लिए 152 करोड़ के दो फ्रीज खरीदे जाने थे. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ट्रंप का उड़न खटोला कितना स्पेशल है.

एयरफोर्स वन में मनोरंजन का पूरा इंतजाम है. इसमें 20 हाई डेफिनेशन टीवी लगी हैं. जिस पर अमेरिका के राष्ट्रपति दुनिया का कोई भी चैनल देख सकते हैं. अगर ट्रंप चाहें तो आकाश से ही टेलीकॉन्फेंसिंग भी कर सकते हैं. व्हाइट हाउस या पेंटागन से सेकंड भर में ट्रंप जुड़ जाते हैं और लाइव ऑर्डर देते हैं.

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एयरफोर्स वन में ही उनका घर और ऑफिस दोनों मौजूद रहता है. ट्रंप के पसंद का वॉडरोब भी जंबो जेट में रहता है. जहां ट्रंप उपनी पत्नी और परिवार की पसंद के ड्रेस और जूते रखे होते हैं. ट्रंप की जरूरत का हर छोटे से छोटा सामान एयरफोर्स वन में मौजूद रहता है.

ट्रंप के विमान में सैकड़ों लोगों का खाना बनाने की व्यवस्था होगी. यहां हमेशा 2000 लोगों का खाना पैक करके रखा जाता है और 100 लोग एक साथ खाना खा सकते हैं. जो भी प्रेसिडेंट और उनके सहयोगियों को पसंद है वो डिश कुछ ही देर में हाजिर हो जाती है. ये व्यवस्था आपको दिल्ली और वाशिंगटन के बड़े बड़े होटलों में नहीं मिलेगी वो एयरफोर्स वन में मिल जाएगी.

1 घंटे की उड़ान का खर्च 1 करोड़ 45 लाख रुपए

एयरफोर्स वन की उड़ान पर हर घंटे 1 करोड़ 45 लाख रुपए का खर्च आता है. इस हिसाब से वाशिंगटन और दिल्ली की दूरी करीब 12 हजार किलोमीटर है. और इस सफर को पूरा करने में करीब 12 घंटे का वक्त लगेगा. इस हिसाब से एयरफोर्स वन के अमेरिका से भारत पहुंचने का खर्च ही करीब 17 करोड़ 40 लाख रुपए है.

एयरफोर्स वन में कई जगह ऐसे हथियार फिट किए गए हैं जिन्हें आम नजरो से देखा ही नहीं जा सकता. ये हथियार उसी समय अपना जौहर दिखाते हैं, जब जरूरत पड़ती है. अगर इमरजेंसी में ट्रंप को प्लेन से बाहर निकालने की नौबत आएगी तो हर इमरजेंसी गेट के साथ ही उसकी सीढ़ी भी होगी. यानी नीचे उतरने के लिए प्रेसिडेंट को किसी भी देश की मदद नहीं चाहिए होगी.

आम विमानों में उतरने के लिए एक दरवाजा होता है. लेकिन एअर फोर्स वन में दो दरवाजे हैं. कॉकपिट में पायलट के आलावा इंजीनियर और नेविगेटर हमेशा मौजूद होते हैं, जो किसी भी खराबी से विमान को बचाते हैं और आपात स्थिति में रास्ता खोजने में मदद करते हैं.

जब ट्रंप अपने पूरे जलवे के साथ इसकी सीढ़ियो से नीचे उतरते हैं तो वो क्षण हर अमेरिकी को गौरव से भर देता है. एयरफोर्स वन सिर्फ एक विमान नहीं अमेरिका की मर्यादा है, जिसे पार करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.

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