गर्दन कटने के बाद भी 18 महीने तक जिंदा रहा मुर्गा पर कैसे? ये है इसके पीछे की साइंस

गर्दन कटने के बाद भी मुर्गा जिंदा था और अपने कटे हुए सिर के पास सो रहा है. किसान को यह बात किसी चमत्कार से कम नहीं लगी. उसने मुर्गे का नाम माइक रख दिया और उसकी देखभाल करने लगा.
Headless rooster lived for 18 months, गर्दन कटने के बाद भी 18 महीने तक जिंदा रहा मुर्गा पर कैसे? ये है इसके पीछे की साइंस

अमेरिका के कोलार्डो राज्य में एक किसान ने मुर्गे की गर्दन काट दी. गर्दन धड़ से अलग हो जाने के बाद भी मुर्गा 18 महीने तक जीवित रहा. मुर्गे के बारे में सुनकर लोग हैरान हैं, आइए आपको बताते हैं इस चमत्कार के पीछे क्या वजह है.

अमेरिका के कोलार्डो में लॉयड ऑस्लन नाम का किसान रहता था. यह साल 1940 की बात है, जब लॉयड को भूख लगी. उसने खेत में एक मोटा ताजा मुर्गा देखा. किसान ने मुर्गे की गर्दन कुल्हाड़ी से उड़ा दी, गर्दन और धड़ दोनों अलग हो गए. मुर्गे को इस हालत में देख किसान दुखी हो गया और उसने मुर्गे को छोड़ दिया. ये मुर्गा बिना सिर के भी घंटों घूमता रहा. रात हुई और किसान जाकर सो गया. अगली सुबह किसान ने देखा कि मुर्गा जिंदा है और अपने कटे हुए सिर के पास सो रहा है. किसान को यह बात किसी चमत्कार से कम नहीं लगी. उसने मुर्गे का नाम माइक रख दिया और मुर्गे की देखभाल करने लगा. आईड्रॉपर से मुर्गे की खाने की नली में अनाज और पानी डालना शुरू कर किया.

धीरे धीरे लोगों को माइक के बारे में पता चला. माइक के इस तरह होने पर शर्तें लगने लगींं और किसान मुर्गे को दिखाकर शर्त जीत जाता था. समय के साथ ये बात दूर तक फैल गई. अखबार वालों ने किसान का इंटरव्यू भी लिया. सड़कोंं पर एक तमाशा दिखाने वाले ने मुर्गे का नाम ‘मिरकल माइक’ रख दिया. तमाशे के शो में माइक को लेकर आने के बदले तमाशे वाले ने उसे 25 सेंट्स भी दिए. इस तरह किसान की अच्छी कमाई होने लगी.

किसान मुर्गे को सॉल्ट लेक सिटी में स्थित यूटा यूनिवर्सिटी लेकर गया. वैज्ञानिक भी माइक को देखकर हैरान रह गए. माइक पर कई परीक्षण करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि सिर से दिल को पहुंचाने वाली नस कुल्हाड़ी से कट नहीं पाई थी और उसमें खून जमा हो गया था. नस ब्‍लॉक होने की वजह से ज्याद खून बह नहीं पाया और माइक जिंदा बच गया. उसका दिमाग काम कर रहा था और वो चल पा रहा था.

एक बार किसान, मुर्गे के साथ कहीं जाने के लिए फीनिक्‍स के एक होटल में ठहर गया. आधी रात को किसान को माइक के गला जाम होने की आवाज सुनाई दी. किसान के परिवार वाले वो सीरिंज ढूंढने लगे, जिसकी मदद से वो माइक का गला साफ करते थे. सीरिंज नहीं मिली और गर्दन धड़ से अलग होने के 18 महीने बाद माइक मर गया.

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